रायपुर: छत्तीसगढ़ में रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 यानी रेरा कानून की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में बिना रेरा पंजीयन के जमीन, मकान और फ्लैट की खरीदी-बिक्री का गोरखधंधा तेजी से फल-फूल रहा है। बिल्डर और जमीन दलाल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आकर्षक रील और वीडियो बनाकर “फ्री रजिस्ट्री” व “लग्जरी सुविधाओं” का झांसा देकर आम लोगों को गुमराह कर रहे हैं।
शहरों के आउटर इलाकों में बिना किसी वैधानिक अनुमति के बड़ी-बड़ी कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं। कई जगहों पर प्लॉटिंग कर जमीन और मकान बेचे जा रहे हैं, जबकि संबंधित प्रोजेक्ट्स का रेरा में कोई पंजीयन ही नहीं है। ऑनलाइन प्रचार-प्रसार के कारण ऐसे कई अवैध प्रोजेक्ट रेरा की निगरानी से बाहर रह जाते हैं, जिससे बिल्डर और दलाल मोटी कमाई कर रहे हैं।
रेरा की सख्ती, अवैध प्रोजेक्ट्स पर कार्रवाई शुरू
हालांकि, छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) ने अब ऐसे मामलों पर सख्ती बढ़ा दी है। जिन प्रोजेक्ट्स ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से अनुमति तो ली है, लेकिन रेरा अधिनियम के तहत पंजीयन नहीं कराया है, उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। रेरा द्वारा संबंधित प्रोजेक्ट संचालकों को प्रारंभिक नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है।
136 प्रोजेक्ट्स की स्वतः जांच, भारी जुर्माना और बिक्री पर रोक
रेरा की रजिस्ट्रार आस्था राजपूत ने बताया कि पिछले सात वर्षों में प्राधिकरण ने स्वयं के संज्ञान से 136 ऐसे प्रोजेक्ट्स की जांच की, जिन पर पहले कोई शिकायत दर्ज नहीं थी। जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर इन प्रोजेक्ट्स पर भारी जुर्माना लगाया गया और संपत्तियों की खरीदी-बिक्री पर रोक लगाई गई।
उन्होंने आम नागरिकों से अपील की है कि फ्लैट, प्लॉट, विला या कमर्शियल यूनिट खरीदने से पहले यह अवश्य जांच लें कि संबंधित प्रोजेक्ट रेरा में पंजीकृत है या नहीं। यह जानकारी रेरा की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
106 प्रोजेक्ट्स चिन्हित, ब्लैकलिस्ट की तैयारी
रेरा की प्रारंभिक पड़ताल में 106 ऐसे प्रोजेक्ट्स चिन्हित किए गए हैं, जहां बिना रेरा पंजीयन के निर्माण कार्य या बिक्री शुरू की गई। इनमें कई प्रोजेक्ट्स ऐसे भी हैं, जहां ब्रोशर में किए गए वादों के अनुरूप निर्माण नहीं हुआ या समय पर काम पूरा नहीं किया गया। प्राधिकरण अब ऐसे बिल्डरों को ब्लैकलिस्ट करने, पंजीयन रद्द करने और कई गुना आर्थिक जुर्माना लगाने की तैयारी में है।
दो भूमि स्वामियों पर 5 लाख का जुर्माना
इसी माह रेरा ने रायपुर के दो भूमि स्वामियों गोवर्धन और रामानुज पर 5 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया है। दोनों “ओम फार्म, लखोली रेलवे स्टेशन” नाम से प्लॉट विकसित कर बिना वैध रेरा पंजीयन के विज्ञापन, प्रचार-प्रसार और विक्रय कर रहे थे। यह रेरा अधिनियम की धारा 3 का स्पष्ट उल्लंघन है, जिसके तहत बिना पंजीकरण किसी भी परियोजना का प्रचार या विक्रय प्रतिबंधित है।
तीन साल की सजा और पांच लाख तक जुर्माने का प्रावधान
रेरा कानून के तहत बिना पंजीयन रियल एस्टेट कारोबार करने पर तीन साल तक की सजा और पांच लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। इसके बावजूद प्रदेश भर में बड़ी संख्या में जमीन दलाल, एजेंट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बिना रेरा पंजीयन के प्रॉपर्टी बेचने का धंधा कर रहे हैं।
ऐसे मामलों में खरीदार और विक्रेता दोनों ही ठगी का शिकार हो रहे हैं और कानूनी पचड़ों में फंस रहे हैं, जबकि अवैध दलाल आसानी से बच निकलते हैं। रेरा ने स्पष्ट किया है कि बिना पंजीयन प्लॉटिंग, विज्ञापन या बिक्री को गंभीर कानूनी अपराध माना जाएगा और आगे और भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।
Author: Deepak Mittal










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