आवासीय स्कूल में सुसाइड की कोशिश का मामला दबाने का आरोप, उजागर होने पर प्राचार्य और हॉस्टल वार्डन पर कार्रवाई

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मोहला: केंद्रीय एकलव्य आवासीय विद्यालय में अध्ययनरत नाबालिग आदिवासी छात्रों के साथ कथित बर्बरता और आत्महत्या के प्रयास के गंभीर मामले में प्रशासन ने प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए प्राचार्य और हॉस्टल वार्डन को उनके पद से हटा दिया है। वहीं छात्रों के साथ मारपीट के आरोपों में घिरे एक पीटीआई और दो लेक्चरर्स को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

बताया जा रहा है कि विद्यालय में नाबालिग छात्राओं द्वारा जहर पीकर आत्महत्या का प्रयास किए जाने की घटना को कथित तौर पर स्थानीय स्तर पर दबाने की कोशिश की गई। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा इसे “पारिवारिक कलह” का मामला बताकर संवेदनशील प्रकरण को हल्के में लेने के आरोप भी सामने आए हैं।

कलेक्टर के निर्देश पर देर रात जांच, छात्रों ने दर्ज कराए बयान

मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर तूलिका प्रजापति के निर्देश पर 12 जनवरी की रात करीब 9 बजे अपर कलेक्टर जी.आर. मरकाम की अध्यक्षता में प्रशासनिक टीम ने एकलव्य आवासीय विद्यालय परिसर में प्रवेश कर जांच शुरू की। टीम में डिप्टी कलेक्टर शुभांगी गुप्ता, एसडीएम हेमेंद्र भूआर्य, तहसीलदार अनुरिमा टोप्पो और आरआई तामेश्वरी इस्दा शामिल थीं।

जांच के दौरान छात्रों ने सामूहिक रूप से उनके साथ हो रहे अपमानजनक व्यवहार, शारीरिक प्रताड़ना और मारपीट को लेकर एक-एक कर बयान दर्ज कराए। प्रारंभिक जांच के आधार पर प्राचार्य और हॉस्टल वार्डन को विद्यालय के चार्ज से पृथक कर दिया गया है।

बाल संरक्षण आयोग ने लिया संज्ञान

इन घटनाक्रमों के बीच शुक्रवार को बाल संरक्षण आयोग की टीम भी मामले का संज्ञान लेते हुए एकलव्य आवासीय विद्यालय परिसर पहुंची और स्थिति की पड़ताल की। आयोग द्वारा छात्रों से बातचीत कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

सुसाइड प्रयास पर उठे सवाल, जांच पर संदेह

गौरतलब है कि महज छह दिनों के भीतर नाबालिग आदिवासी छात्राओं द्वारा आत्महत्या के प्रयास की घटनाएं सामने आई हैं। जांच अधिकारी अपर कलेक्टर जी.आर. मरकाम ने इन मामलों को पारिवारिक कलह से जोड़कर देखा है, जबकि आत्महत्या का प्रयास करने वाली छात्राओं को उनके घर भेज दिया गया है।

हालांकि सवाल यह भी उठ रहे हैं कि यदि विद्यालय में सब कुछ सामान्य था, तो एक के बाद एक छात्राएं ऐसा कठोर कदम उठाने को मजबूर क्यों हुईं। जहर खुरानी के मामले में पुलिस की निष्क्रियता और विभागीय स्तर पर प्रकरण को दबाने के प्रयासों को लेकर भी संदेह की स्थिति बनी हुई है।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और प्रशासनिक व आयोगीय रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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Author: Deepak Mittal

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