दीपक मित्तल
दल्लीराजहरा, धार्मिक नगरी दल्लीराजहरा में मकर संक्रांति का पर्व दो दिनों तक हर्षोल्लास के साथ मनाया गया रविवार और सोमवार दो दिनों का यह महा पर्व मकर संक्रांति के रूप में विधि विधान प्राचीन परंपराओं के अनुसार मनाया गया प्रातः से ही महिलाएं मकर संक्रान्ति को लेकर विभिन्न व्यंजन तैयार कर दल्लीराजहरा के विभिन्न मंदिरों में पहुंचे , आचार्य पंडित प्रेम शुक्ला और सनत पाठक ने बताया कि उत्तर भारत में यह पर्व मकर संक्रांति तो गुजरात में उत्तरायण के नाम से जाना जाता है. पंजाब में इसे लोहड़ी, उत्तराखंड में उत्तरायणी और केरल में पोंगल के नाम से मनाते हैं. वैसे तो ये त्योहार हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है, लेकिन इस बार मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाया जा रहा है.
पौष मास में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. इस बार मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई गई,,
पंडित सनत पाठक के अनुसार. ऐसी मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि से मिलने के लिए आते हैं. सूर्य और शनि का संबंध इस पर्व से होने के कारण यह काफी महत्वपूर्ण हो जाता है.
ज्योतिष में मकर संक्रांति को सूर्य की उपासना का महापर्व कहा जाता है. मकर संक्रांति के साथ ही खरमास की समाप्त होती है और इस दिन से सूर्यदेव अपने तेज के साथ चलना शुरू करते हैं. इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे. मकर संक्रांति का महापर्व इस बार 15 जनवरी मनाया गया,,
ऐसी मान्यता है कि इसी त्योहार पर सूर्य देव अपने पुत्र शनि से मिलने के लिए आते हैं. सूर्य और शनि का सम्बन्ध इस पर्व से होने के कारण यह काफी महत्वपूर्ण हो जाता है. आम तौर पर शुक्र का उदय भी लगभग इसी समय होता है इसलिए यहां से शुभ कार्यों की शुरुआत होती है.
Author: Deepak Mittal









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