नई दिल्ली: आधुनिक जीवनशैली में घंटों कुर्सी पर बैठकर काम करना, मोबाइल-लैपटॉप पर लगातार समय बिताना और घर पर भी निष्क्रिय रहना आम बात हो गई है। शुरुआत में यह आरामदायक लगता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यही आदतें धीरे-धीरे गंभीर बीमारियों की वजह बन रही हैं। मोटापा, पीठ और जोड़ों का दर्द, ब्लड प्रेशर, मधुमेह और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
आयुर्वेद के अनुसार, शरीर को संतुलित मात्रा में गतिविधि की आवश्यकता होती है। निष्क्रिय जीवनशैली से वात, पित्त और कफ—तीनों दोष असंतुलित हो जाते हैं, जिससे अनेक रोग जन्म लेते हैं। चरक संहिता में भी कहा गया है—
“व्यायामात् लभते स्वास्थ्यं दीर्घायुष्यं बलं सुखम्”
अर्थात व्यायाम से स्वास्थ्य, दीर्घायु, बल और सुख की प्राप्ति होती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि लगातार बैठे रहने से मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ता है, जिससे फैट जमा होने लगता है और मोटापा व मधुमेह का खतरा बढ़ता है। रक्त संचार प्रभावित होने से हृदय रोग और उच्च रक्तचाप की आशंका रहती है। जोड़ों और स्नायु में जकड़न के कारण पीठदर्द और गठिया की शिकायतें बढ़ती हैं। मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका असर पड़ता है—सेरोटोनिन और डोपामिन जैसे हार्मोन कम बनने से तनाव, चिंता और अवसाद का जोखिम बढ़ जाता है। पाचन तंत्र पर असर पड़ने से कब्ज और गैस जैसी समस्याएं भी आम हो जाती हैं।
आयुर्वेद इन समस्याओं के सरल समाधान भी सुझाता है। रोजाना 30 मिनट टहलना या हल्का दौड़ना, सूर्य नमस्कार करना और ताड़ासन, भुजंगासन, त्रिकोणासन जैसे योगासन लाभकारी बताए गए हैं। अनुलोम-विलोम, कपालभाति और सूर्यभेदी जैसे प्राणायाम से शरीर में ऊर्जा बढ़ती है और मानसिक तनाव कम होता है। साथ ही हल्का, संतुलित और ताजे भोजन को प्राथमिकता देने की सलाह दी जाती है।
दिनचर्या में छोटे बदलाव भी बड़ा असर डाल सकते हैं—लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का उपयोग, हर घंटे कुछ मिनट टहलना, टीवी देखते समय स्ट्रेचिंग करना। विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी-सी नियमित सक्रियता से न केवल शरीर, बल्कि मन और आत्मा भी स्वस्थ रहते हैं। तेज और डिजिटल जीवनशैली में इन आदतों को अपनाकर कई गंभीर बीमारियों से बचाव संभव है।
Author: Deepak Mittal









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