हाई कोर्ट ने दुर्ग जिला न्यायालय के आदेश को किया खारिज, कड़ी टिप्पणी के साथ याचिकाकर्ता को सेवा में बहाल करने का आदेश..

Picture of Deepak Mittal

Deepak Mittal

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दुर्ग जिला न्यायालय द्वारा स्टेनोग्राफर के सेवा समाप्ति के आदेश को खारिज करते हुए कड़ी टिप्पणी की है। हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सेवा में बहाल करने और बकाया वेतन का 50 प्रतिशत भुगतान करने का आदेश दिया है।

याचिकाकर्ता दिशान सिंह डहरिया ने दुर्ग जिला न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने अपनी सेवा समाप्ति के आदेश को रद्द करने और सेवा में वापसी की मांग की थी। याचिका के अनुसार, दिशान सिंह की नियुक्ति जिला एवं सत्र न्यायालय दुर्ग में 11 अन्य उम्मीदवारों के साथ आशुलिपिक (हिन्दी) के पद पर हुई थी और उन्हें तृतीय सिविल न्यायाधीश, वर्ग-1 के कोर्ट में नियुक्त किया गया था। आरोप था कि उन्होंने अपने अधिकारी के साथ अनुचित व्यवहार किया था, जिसकी शिकायत 30 जनवरी 2019 को जिला एवं सत्र न्यायाधीश से की गई थी।

दुर्ग जिला न्यायालय ने 5 अगस्त 2019 को दिशान सिंह के खिलाफ मेमो जारी किया और उन पर आरोप लगाया कि उन्होंने गोपनीय नोटिस की फोटोकॉपी सीधे छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय को भेज दी थी, जो कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियमों का उल्लंघन था। उन्हें शोकॉज नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया गया था, लेकिन संतोषजनक जवाब न देने पर दुर्ग जिला न्यायालय ने उनकी सेवा समाप्त कर दी।

याचिकाकर्ता ने अपने जवाब में कहा कि शिकायत की एक प्रति संघ के एक पदाधिकारी के पास थी, जिसने उसे वाट्सएप ग्रुप में वायरल कर दिया। याचिकाकर्ता का कहना था कि इसे वायरल करने के समय उसकी सहमति नहीं ली गई थी और यह सब उसकी जानकारी में भी नहीं था।

याचिका में कहा गया कि बिना जांच के उसे हटाना संविधान के अनुच्छेद 311 का उल्लंघन है। मामले की सुनवाई के दौरान, हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने यह पाया कि याचिकाकर्ता को नियुक्ति के समय दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि पर रखा गया था और यदि उनकी सेवा संतोषजनक होती तो उन्हें स्थायी रूप से नियुक्त किया जाता। इस आधार पर, कोर्ट ने कहा कि बिना पर्याप्त कारणों के याचिकाकर्ता को सेवा से नहीं हटाया जा सकता।

कोर्ट ने जिला न्यायालय के आदेश को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को सेवा में बहाल करने और बकाया वेतन का 50 प्रतिशत भुगतान करने का आदेश दिया।

Deepak Mittal
Author: Deepak Mittal

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

October 2026
S M T W T F S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *