रायपुर छत्तीसगढ़ के चर्चित कथित शराब घोटाले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण (EOW) एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की जांच के बाद आबकारी विभाग के अपर आयुक्त आशीष श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया है। वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग ने शनिवार, 17 अक्टूबर को इसका आदेश जारी किया।
आदेश के अनुसार ब्यूरो में दर्ज अपराध क्रमांक 04/2024 के मामले में श्रीवास्तव के विरुद्ध जांच पूरी होने के बाद आरोप प्रथम दृष्टया सिद्ध पाए गए। इसी आधार पर 13 अक्टूबर को पूरक अभियोग पत्र तैयार किया गया।
जिसे 14 अक्टूबर को रायपुर की विशेष अदालत (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) में पेश किया गया। श्रीवास्तव उस समय रायपुर में उपायुक्त आबकारी के पद पर पदस्थ थे।
मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7, 7-क, 8, 12 और 13 के साथ भारतीय दंड विधान की धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी, 201 और 109 के तहत प्रकरण दर्ज है। इनमें धोखाधड़ी, कूटरचना, जालसाजी, आपराधिक षड्यंत्र और साक्ष्य मिटाने जैसी धाराएं शामिल हैं।
अदालत में अभियोग पत्र पेश होने के बाद राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(ख) के परन्तुक के तहत कार्रवाई की।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निलंबन अदालत में चालान पेश होने की तारीख, यानी 14 अक्टूबर 2026 से प्रभावी माना जाएगा। यानी कार्रवाई भले 17 अक्टूबर को हुई, पर निलंबन की अवधि तीन दिन पीछे से गिनी जाएगी।
निलंबन अवधि में श्रीवास्तव का मुख्यालय आबकारी आयुक्त कार्यालय, नवा रायपुर रहेगा। इस दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। आदेश राज्यपाल के नाम से विशेष सचिव देवेन्द्र सिंह भारद्वाज के डिजिटल हस्ताक्षर से जारी हुआ।
गौरतलब है कि प्रथम दृष्टया दोष सिद्ध पाए जाने का अर्थ अंतिम दोषसिद्धि नहीं है। मामले की सुनवाई विशेष अदालत में होगी, जहां आरोपों की न्यायिक परीक्षा होगी।
Author: Deepak Mittal









