नई दिल्ली: खुद को धर्मगुरु बताने वाले स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती को फर्जी डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट इस्तेमाल के मामले में दिल्ली की अदालत से राहत मिली है। पटियाला हाउस कोर्ट ने इस मामले में उन्हें जमानत दे दी है। हालांकि, अन्य गंभीर मामलों में न्यायिक हिरासत में होने के कारण फिलहाल उनकी जेल से रिहाई नहीं हो सकेगी।
पटियाला हाउस कोर्ट ने 20 जनवरी को डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट केस में जमानत मंजूर की। लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में दी गई जमानत का असर स्वामी चैतन्यानंद पर दर्ज अन्य आपराधिक मामलों पर नहीं पड़ेगा। फिलहाल वे कॉलेज की छात्राओं से छेड़छाड़ के मामले में न्यायिक हिरासत में हैं।
छात्राओं से छेड़छाड़ के गंभीर आरोप
स्वामी चैतन्यानंद पर एक कॉलेज की छात्राओं के साथ छेड़छाड़ का गंभीर आरोप है। बताया जा रहा है कि यह मामला उसी कॉलेज से जुड़ा है, जहां वे डायरेक्टर के पद पर कार्यरत थे। छात्राओं की शिकायत के बाद मामला सामने आया, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया और वे अभी इसी केस में जेल में बंद हैं।
कोर्ट ने पुलिस जांच पर जताई नाराजगी
डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट मामले में जमानत देते हुए कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की जांच पर कड़ी फटकार लगाई। न्यायिक मजिस्ट्रेट अनिमेष कुमार ने जांच को लापरवाह और कैजुअल बताया। अदालत ने कहा कि पुलिस ने चार्जशीट बेहद लापरवाही से दाखिल की और कई अहम पहलुओं की अनदेखी की गई।
कोर्ट के अनुसार, पुलिस अब तक ऐसा कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी जिससे यह साबित हो सके कि स्वामी चैतन्यानंद ने खुद फर्जी डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट बनवाई या उसका इस्तेमाल किया। अदालत ने यह भी हैरानी जताई कि जिस ड्राइवर ने कथित तौर पर वाहन पर नकली नंबर प्लेट लगाई थी, उसे पुलिस ने संदिग्ध तक नहीं माना।
इसके अलावा, जांच में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि फर्जी नंबर प्लेट कहां से आई और न ही यह साबित किया जा सका कि स्वामी ने वास्तव में उस वाहन का इस्तेमाल किया था। इन तथ्यों के आधार पर अदालत ने इस मामले में जमानत मंजूर की।
स्वामी चैतन्यानंद पर दर्ज हैं कुल 5 मामले
जानकारी के मुताबिक, स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती पर कुल 5 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से 3 मामले वर्ष 2025 में दर्ज किए गए। इनमें सबसे गंभीर मामला कॉलेज की 17 छात्राओं से छेड़छाड़ का है।
इसके अलावा, उन पर फर्जी तरीके से ट्रस्ट बनाकर हर महीने करीब 40 लाख रुपये के गबन का भी आरोप है, जिसकी जांच अभी जारी है।
वहीं, वर्ष 2009 में डिफेंस कॉलोनी थाने में धोखाधड़ी और 2016 में वसंत कुंज थाने में एक छात्रा से छेड़छाड़ के मामले भी दर्ज हुए थे, हालांकि इन मामलों में आगे कार्रवाई नहीं हो सकी थी।
डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट मामले में भले ही उन्हें जमानत मिल गई हो, लेकिन अन्य गंभीर मामलों के चलते स्वामी चैतन्यानंद की कानूनी मुश्किलें अभी खत्म होती नजर नहीं आ रही हैं।
Author: Deepak Mittal










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