किरण भदौरिया
नवभारत टाइम्स 24×7
बचेली। आर ई सी कॉलोनी दुर्गा मंदिर में राजस्थानी समाज की महिलाओं ने पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ गणगौर पूजा संपन्न की। इस धार्मिक आयोजन में सभी महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पूजन के बाद प्रसाद वितरण किया गया, जिसके उपरांत भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ।
गणगौर पर्व के महत्व की बात करें तो धार्मिक मान्यता के अनुसार, विवाहित और नवविवाहित महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती के प्रतीक ईशर-गणगौर की पूजा करती हैं, जिससे उनके पतियों की आयु लंबी होती है। वहीं, अविवाहित युवतियां इस पूजा के माध्यम से योग्य वर प्राप्ति की कामना करती हैं।

यह पर्व विशेष रूप से महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। देवी पार्वती के सम्मान में मनाए जाने वाले इस उत्सव को वैवाहिक प्रेम और सुख-समृद्धि से जोड़ा जाता है। गणगौर उत्सव के दौरान महिलाएं पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार मिट्टी की शिव-पार्वती की मूर्तियां बनाकर उनका श्रंगार करती हैं और पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करती हैं। इस दिन उपवास रखकर वैवाहिक जीवन की खुशहाली की प्रार्थना की जाती है।
गणगौर पूजा का शुभ मुहूर्त:
चैत्र शुक्ल तृतीया तिथि प्रारंभ: 31 मार्च, प्रातः 9:11 बजे
चैत्र शुक्ल तृतीया तिथि समाप्त: 1 अप्रैल, प्रातः 5:42 बजे
इस वर्ष गणगौर व्रत 31 मार्च को श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ रखा गया।
Author: Deepak Mittal









