नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील की घोषणा से कई महीने पहले ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अमेरिकी प्रशासन को भारत का रुख स्पष्ट कर दिया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में ट्रेड एग्रीमेंट की घोषणा किए जाने से पहले डोभाल ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से निजी बातचीत में साफ कहा था कि भारत द्विपक्षीय रिश्तों में आई कड़वाहट को पीछे छोड़कर संवाद चाहता है, लेकिन किसी भी दबाव में फैसला नहीं करेगा।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इस बातचीत से अवगत अधिकारियों ने बताया कि वाशिंगटन यात्रा के दौरान डोभाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि भारत पर ट्रंप या उनके वरिष्ठ सहयोगियों का दबाव असर नहीं डालेगा। उन्होंने यह संदेश दृढ़ता के साथ, लेकिन भविष्य को ध्यान में रखते हुए दिया—भारत टकराव नहीं, जुड़ाव चाहता है।
रिपोर्ट के मुताबिक डोभाल ने यह भी कहा था कि यदि जरूरत पड़ी तो नई दिल्ली ट्रंप का कार्यकाल समाप्त होने तक इंतजार करने को तैयार है, लेकिन वह चाहता है कि अमेरिकी प्रशासन संबंधों को स्थिर करने के लिए अपनी सार्वजनिक आलोचनाएं कम करे। बताया जा रहा है कि यह मुलाकात सितंबर की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बातचीत के तुरंत बाद हुई थी।
इस पहल से यह स्पष्ट हुआ कि मतभेद बने रहने के बावजूद भारत व्यापार और ऊर्जा जैसे अहम क्षेत्रों में रिश्तों का माहौल सुधारना चाहता था। उस समय तक किसी बड़ी सफलता के सार्वजनिक संकेत नहीं मिले थे।
सोमवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की कि भारत और अमेरिका एक व्यापार समझौते पर पहुंच गए हैं। ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए उन्होंने अमेरिकी टैरिफ में कटौती की बात कही और दावा किया कि भारत रूसी तेल की खरीद बंद करेगा। साथ ही यह भी कहा गया कि भारत अमेरिका और संभवतः वेनेजुएला से अधिक ऊर्जा खरीदेगा और अमेरिकी सामानों पर टैरिफ व गैर-टैरिफ बाधाओं को शsuggestा शून्य करेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस घोषणा का स्वागत करते हुए मेड इन इंडिया उत्पादों पर शुल्क कम करने के लिए ट्रंप को धन्यवाद दिया। हालांकि, उनकी सार्वजनिक प्रतिक्रिया में अमेरिकी राष्ट्रपति के कई दावों की पुष्टि नहीं की गई। भारत ने जहां टैरिफ कटौती के पहलू को स्वीकार किया, वहीं रूसी तेल की खरीद रोकने या अमेरिकी सामानों पर शून्य टैरिफ जैसे दावों का खुला समर्थन नहीं किया।
एक्स पर पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी ने इस घटनाक्रम को केवल व्यापार समझौता नहीं, बल्कि व्यापक रणनीतिक अवसर बताया। उन्होंने लिखा,
“जब दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र एक साथ काम करते हैं, तो इससे हमारे लोगों को लाभ होता है और आपसी सहयोग के नए अवसर खुलते हैं।”
प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक मंच पर ट्रंप की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति की नेतृत्व क्षमता वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए अहम है और भारत इस साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए उनके साथ काम करने को तत्पर है।
Author: Deepak Mittal









