Lifestyles: गर्मियों के मौसम में शरीर को ठंडक देने वाले खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है और ऐसे में दही को सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है। दही का सेवन शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ-साथ पाचन को भी बेहतर बनाता है, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार इसका सेवन सही समय और सही तरीके से करना बेहद जरूरी है।
आयुर्वेद में दही को पौष्टिक और बलवर्धक माना गया है। यह पाचन अग्नि को तेज करने में मदद करता है और शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। प्राचीन ग्रंथ चरक संहिता में दही के गुणों का विस्तार से उल्लेख किया गया है। इसमें बताया गया है कि दही भारी, चिकनी और खट्टे स्वाद वाली होती है, इसलिए इसका प्रभाव हर व्यक्ति के शरीर पर अलग-अलग हो सकता है।
आयुर्वेद के अनुसार दही का सेवन दोपहर के भोजन के साथ करना सबसे बेहतर माना जाता है। दही को मथकर छाछ के रूप में लेना शरीर के लिए और भी लाभकारी होता है। इसमें हल्का मीठा शहद या खांड मिलाकर सेवन किया जा सकता है, लेकिन नमक मिलाने से बचने की सलाह दी जाती है क्योंकि यह विरुद्ध आहार माना जाता है। साथ ही फ्रिज से निकला बहुत ठंडा दही खाने से पाचन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार दही का सेवन उन लोगों के लिए लाभकारी है जिनका पाचन अच्छा होता है, जो अधिक शारीरिक श्रम करते हैं या जो दुबले-पतले और कमजोरी महसूस करते हैं। हालांकि सर्दी-जुकाम, कफ, मुहांसों या त्वचा एलर्जी से पीड़ित लोगों को दही खाने से बचने की सलाह दी जाती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक रात के समय दही का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे शरीर में भारीपन, गैस और एसिडिटी की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए गर्मियों में दही का सेवन फायदेमंद तो है, लेकिन सही समय और सही तरीके का ध्यान रखना जरूरी है।
Author: Deepak Mittal








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