कच्चे तेल में उछाल के बावजूद भारत में फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रहने की संभावना

Picture of Deepak Mittal

Deepak Mittal

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं, लेकिन इसके बावजूद भारत में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना कम बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार सरकार को उम्मीद है कि सरकारी तेल विपणन कंपनियां कुछ समय तक कीमतों में आई बढ़ोतरी का असर खुद वहन कर लेंगी।

बताया जा रहा है कि Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum जैसी सरकारी तेल कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल के बावजूद फिलहाल खुदरा ईंधन कीमतों को स्थिर रखने के लिए कहा गया है। इससे कंपनियों को कुछ समय तक कम मुनाफे के साथ काम करना पड़ सकता है।

इस बीच वैश्विक बाजार में West Texas Intermediate (WTI) का भाव करीब 27 प्रतिशत बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। वहीं Brent Crude का भाव भी लगभग 28 प्रतिशत बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल हो गया है। साल 2022 के बाद पहली बार दोनों प्रमुख कच्चे तेल सूचकांक 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचे हैं।

तेल की कीमतों में यह उछाल मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष और Strait of Hormuz में आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण आया है। इसके बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम फिलहाल पूरे देश में स्थिर बने हुए हैं। आम तौर पर भारत में ईंधन की कीमतें वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों के अनुसार तय होती हैं, लेकिन ज्यादा उतार-चढ़ाव की स्थिति में सरकार कभी-कभी तेल कंपनियों से कीमतों का बोझ खुद उठाने को कहती है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार भारत की ऊर्जा भंडारण क्षमता पहले से बेहतर हुई है, जिससे ईंधन आपूर्ति को लेकर सरकार का भरोसा बढ़ा है। साथ ही भारत ने कच्चे तेल के आयात के स्रोतों को भी विविध बनाया है, ताकि संवेदनशील समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम की जा सके।

बताया गया कि पहले भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर के स्रोतों से आता था, जो अब बढ़कर करीब 70 प्रतिशत हो गया है। इस बीच खबर है कि Qatar के ऊर्जा मंत्री Saad al-Kaabi ने चेतावनी दी है कि यदि मध्य पूर्व में संघर्ष कुछ और दिनों तक जारी रहता है तो खाड़ी देशों के निर्यातक फोर्स मेज्योर घोषित कर सकते हैं, जिससे तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। वहीं Donald Trump ने भी तेल की कीमतों में आई तेजी को ईरान के परमाणु खतरे का सामना करने की अस्थायी कीमत बताया है।

Deepak Mittal
Author: Deepak Mittal

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

November 2026
S M T W T F S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *