बिलासपुर: सेक्स स्कैंडल के नाम पर अवैध वसूली करने वाले गिरोह के कथित मददगार की अग्रिम जमानत याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस Ramesh Sinha की बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि ऐसे गंभीर मामलों में हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
6 लाख की मांग, 2.75 लाख की वसूली
मामला बलौदाबाजार के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का है, जहां एक गिरोह ने पीड़ित अमरीश साहू को कथित तौर पर सेक्स स्कैंडल में फंसाने की धमकी देकर 6 लाख रुपये की मांग की थी। भयवश पीड़ित ने किस्तों में कुल 2.75 लाख रुपये आरोपियों को दे दिए।
जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी संकेत शुक्ला ने अवैध वसूली की रकम आरोपियों तक पहुंचाने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी।
गवाह से बना आरोपी
शुरुआत में पुलिस ने संकेत शुक्ला को मामले में गवाह बनाया था, लेकिन आगे की जांच में उसकी भूमिका संदिग्ध पाई गई। पुलिस के अनुसार, वह गिरोह के मुख्य सदस्यों के साथ मिलकर वसूली में सक्रिय था। इसके बाद उसके खिलाफ पूरक चालान (सप्लीमेंट्री चार्जशीट) पेश किया गया।
फरार रहने और आपराधिक रिकॉर्ड का उल्लेख
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि आरोपी जांच के दौरान फरार था। उसके खिलाफ पूर्व में भी तीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। साथ ही उस पर उगाही की रकम के लेनदेन में सक्रिय भूमिका निभाने के आरोप हैं।
कोर्ट की टिप्पणी
अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि धमकी और जबरन वसूली जैसे सुनियोजित अपराध समाज के लिए गंभीर खतरा हैं। ऐसे मामलों में आरोपी को राहत नहीं दी जा सकती।
Author: Deepak Mittal








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