17 बार रक्तदान कर मानवता की मिसाल बने अरविंद रामटेके, जरूरतमंदों को दिया जीवन का अमूल्य उपहार

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दल्लीराजहरा। समाज में ऐसे लोग विरले ही होते हैं जो निस्वार्थ भाव से दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए आगे आते हैं। दल्लीराजहरा के वार्ड क्रमांक 18 निवासी अरविंद रामटेके ने रक्तदान के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करते हुए अब तक 17 बार रक्तदान कर मानव सेवा की अनूठी मिसाल कायम की है। उनका यह योगदान न केवल जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवनदायिनी साबित हुआ है, बल्कि युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गया है।


रक्तदान को महादान कहा जाता है और अरविंद रामटेके ने इस विचार को अपने कर्मों से सार्थक किया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार उन्होंने 18 वर्ष की आयु से रक्तदान की शुरुआत की और लगातार वर्षों तक जरूरत पड़ने पर लोगों की सहायता करते रहे। वर्तमान में उनकी आयु 55 वर्ष है और नियमित रक्तदान के बावजूद वे पूरी तरह स्वस्थ एवं सक्रिय हैं। इससे यह भी सिद्ध होता है कि रक्तदान करने से स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता, बल्कि यह समाज सेवा का सबसे बड़ा माध्यम बनता है।


जानकारी के अनुसार अरविंद रामटेके ने अपना पहला रक्तदान वर्ष 1990 में उस समय किया था जब छह माह के एक शिशु को तत्काल रक्त की आवश्यकता थी। मानवीय संवेदनाओं से प्रेरित होकर उन्होंने बिना किसी संकोच के रक्तदान कर उस मासूम की सहायता की। इसके बाद उन्होंने अनेक जरूरतमंद मरीजों के लिए समय-समय पर रक्तदान किया और कई परिवारों के जीवन में आशा की किरण जगाई।


उनका अंतिम दर्ज रक्तदान वर्ष 2010 में एक महिला मरीज के लिए किया गया था। इस प्रकार वर्षों तक लगातार जरूरतमंदों की सहायता करते हुए उन्होंने कुल 17 बार रक्तदान किया। उनका रक्त समूह बी पॉजिटिव है, जिसके माध्यम से उन्होंने अनेक लोगों को नया जीवन देने का कार्य किया।


समाजसेवियों का मानना है कि रक्तदान केवल एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता की रक्षा का संकल्प है। अरविंद रामटेके जैसे रक्तदाता यह साबित करते हैं कि किसी अनजान व्यक्ति की जान बचाने से बड़ा कोई पुण्य कार्य नहीं हो सकता। उनके इस प्रेरणादायी योगदान से निश्चित रूप से नई पीढ़ी रक्तदान के प्रति जागरूक होगी और अधिक से अधिक लोग इस पुनीत अभियान से जुड़ेंगे।


दल्लीराजहरा की धरती पर रक्तदान के माध्यम से मानवता की अलख जगाने वाले अरविंद रामटेके का यह सफर समाज के लिए प्रेरणा, सेवा और संवेदनशीलता का जीवंत उदाहरण बन गया है।

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Author: Deepak Mittal

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