धर्मांतरण करने वाले आदिवासियों को ST आरक्षण और सरकारी लाभ मिलेंगे या नहीं? महाराष्ट्र सरकार ने बनाई 27 सदस्यीय समिति

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महाराष्ट्र सरकार ने धर्मांतरण करने वाले अनुसूचित जनजाति (ST) के सदस्यों को आरक्षण और अन्य सरकारी लाभ जारी रखने के मुद्दे की समीक्षा के लिए 27 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। समिति की अध्यक्षता आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके करेंगे।

आदिवासी विकास विभाग की ओर से 16 जुलाई को जारी आदेश के अनुसार, समिति धर्मांतरण के बाद ST समुदाय के लोगों को आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिए जाने से जुड़ी संवैधानिक और कानूनी स्थिति का अध्ययन करेगी। इसके अलावा समिति केंद्र सरकार और अन्य राज्यों में अपनाई जा रही व्यवस्थाओं की भी समीक्षा कर महाराष्ट्र सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपेगी। हालांकि, रिपोर्ट पेश करने की कोई अंतिम समय-सीमा तय नहीं की गई है।

कानून के अनुसार, ST आरक्षण के मामले में धर्म को लेकर कोई ऐसी बाध्यता नहीं है, जैसी अनुसूचित जाति (SC) के मामले में है। संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत किसी आदिवासी की ST पहचान केवल धर्म बदलने से समाप्त नहीं होती।

यह मुद्दा संघ परिवार से जुड़े संगठनों और बीजेपी के एक धड़े द्वारा लंबे समय से उठाया जाता रहा है। इसी साल मई में जनजातीय सुरक्षा मंच ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन सौंपकर धर्मांतरण करने वाले आदिवासियों को ST सूची से बाहर करने की मांग की थी। मंच का तर्क है कि धर्मांतरण के बाद पारंपरिक आदिवासी आस्था, रीति-रिवाज और संस्कृति छोड़ने वाले लोगों को ST आरक्षण और अन्य सरकारी लाभ नहीं मिलना चाहिए।

हालांकि, यह मुद्दा अभी समीक्षा के स्तर पर है और महाराष्ट्र सरकार की समिति की सिफारिशों के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

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Author: Deepak Mittal

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