मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की कैबिनेट ने आज यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के ड्राफ्ट को आज मंजूरी दे दी। इसे अब 20 जुलाई से शुरू हो रहे विधानसभा के मॉनसून सत्र में पेश किया जाएगा। राजधानी भोपाल के बाहरी इलाके में स्थित जगदीशपुर में आयोजित कैबिनेट की स्पेशल मीटिंग में यूसीसी लागू करने संबंधी बिल पर मुहर लगाई गई। जगदीशपुर को पहले इस्लामपुर के नाम से जाना जाता था।
कैबिनेट की बैठक के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे नारी सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि आदिवासी समुदाय को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। उन्होंने कहा कि बिल का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए गठित कमेटी के समक्ष करीब 80 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं ने जबकि 40 प्रतिशत मुस्लिम पुरुषों ने इस बिल का समर्थन किया।
सीएम ने सभी राजनीतिक दलों से सामाजिक समरसता, महिला सशक्तिकरण और राष्ट्रीय एकता की मजबूती की लिए जा रहे इस विधेयक का दलगत राजनीति से ऊपर उठकर समर्थन देने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि कमेटी के समक्ष भारतीय जनता पार्टी, आम आदमी पार्टी और वामपंथी दलों ने अपना पक्ष रखे, लेकिन हर विषय को हिंदू-मुस्लिम और वोट बैंक के नजरिये से देखने वाली कांग्रेस इससे दूर रही।
उन्होंने कहा कि बिल में विवाह, लिव-इन रिलेशनशिप, गोद लेने, सरोगेसी और एआरटी (टेस्ट ट्यूब बेबी) से जन्मे सभी बच्चों को समान कानूनी दर्जा दिए जाने का प्रावधान है।
रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें अनुसूचित जनजातियों (आदिवासियों) को यूसीसी के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की गई है।
Author: Deepak Mittal









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