अतिवृष्टि से पहले ही जलभराव की मार झेल रहा मुंगेली शहर, राहत से ज्यादा प्रचार पर सवाल

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“जिला प्रशासन आपदा प्रबंधन के प्रचार में व्यस्त, नगर पालिका क्षेत्र की कई कॉलोनियां मामूली बारिश में ही जलमग्न, डायरिया और दूषित पेयजल का बढ़ा खतरा”

मुंगेली। एक ओर मुंगेली जिला प्रशासन संभावित अतिवृष्टि और जलभराव जैसी आपदाओं से निपटने की तैयारियों का व्यापक प्रचार-प्रसार कर रहा है,सोशल मीडिया के माध्यम से वीडियो और जागरूकता संदेश जारी कर आम नागरिकों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। वहीं दूसरी ओर मुंगेली नगर पालिका क्षेत्र की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े कर रही है।

शहर की विभिन्न कॉलोनियों में मामूली बारिश के बाद ही सड़कों, गलियों और खाली भूखंडों में जलभराव की स्थिति बन गई है। कई स्थानों पर लंबे समय से पानी जमा होने के कारण लोगों का पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। खासकर निचले इलाकों और आर्थिक रूप से कमजोर बस्तियों में रहने वाले लोगों को आवागमन, स्वच्छता और दैनिक जीवन से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय तक गंदा पानी जमा रहने से डायरिया, मच्छरजनित रोगों सहित अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। साथ ही यह आशंका भी जताई जा रही है कि जलभराव के कारण दूषित पानी भूजल में मिलकर नलों के माध्यम से पेयजल को भी प्रदूषित कर सकता है, जिससे जनस्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

नागरिकों का आरोप है कि नगर पालिका और जिला प्रशासन द्वारा इन जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी निकालने या स्थायी समाधान की दिशा में अपेक्षित पहल नहीं की गई है। ऐसे में लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब वर्तमान में ही शहर के कई हिस्से जलभराव से जूझ रहे हैं, तब केवल संभावित अतिवृष्टि को लेकर प्रचार-प्रसार करने से आमजन की समस्याओं का समाधान कैसे होगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पड़ोसी जिलों में हुई अतिवृष्टि के बाद प्रशासनिक सक्रियता तो दिखाई दे रही है, लेकिन शहर के भीतर लंबे समय से बनी जलभराव की समस्या के समाधान के लिए ठोस प्रयास नजर नहीं आ रहे हैं। उनका मानना है कि यदि समय रहते इन समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया तो आगामी बारिश के दौरान स्थिति और गंभीर हो सकती है।

शहरवासियों ने जिला प्रशासन और नगर पालिका से मांग की है कि जलभराव वाले क्षेत्रों की तत्काल पहचान कर पानी निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, नालियों की नियमित सफाई कराई जाए तथा संभावित स्वास्थ्य संकट को देखते हुए आवश्यक एहतियाती कदम उठाए जाएं, ताकि नागरिकों को राहत मिल सके।

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Author: Deepak Mittal

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