Lifestyle: आमतौर पर यह माना जाता है कि दिल की बीमारियां पुरुषों में ज्यादा होती हैं, लेकिन हालिया स्टडीज़ से पता चला है कि अब महिलाओं में भी हृदय संबंधी रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार कोविड-19 महामारी के बाद महिलाओं में मौत का सबसे बड़ा कारण Ischemic Heart Disease बनता जा रहा है, जिसे Coronary Artery Disease भी कहा जाता है।
डॉक्टरों के मुताबिक इस बीमारी में कोरोनरी आर्टरीज़ में प्लाक नाम का फैटी पदार्थ जमा होने लगता है, जिससे धमनियां संकरी हो जाती हैं और दिल तक रक्त का प्रवाह प्रभावित होता है। कई बार यह प्लाक टूटकर थक्का बना देता है, जिससे धमनियां पूरी तरह ब्लॉक हो जाती हैं और दिल की मांसपेशियों तक खून और ऑक्सीजन की सप्लाई रुक जाती है। ऐसी स्थिति में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
महिलाओं में लक्षण अक्सर स्पष्ट नहीं होते
विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में इस बीमारी के लक्षण पुरुषों की तुलना में अलग और कम स्पष्ट होते हैं। इनमें अत्यधिक थकान, सांस लेने में दिक्कत, उल्टी, गर्दन या रीढ़ में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। अक्सर महिलाएं इन संकेतों को तनाव, हार्मोनल बदलाव या पाचन समस्या समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले लेती है।
एस्ट्रोजन हार्मोन की अहम भूमिका
महिलाओं में हृदय स्वास्थ्य बनाए रखने में एस्ट्रोजन हार्मोन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह धमनियों को चौड़ा रखने, ब्लड वेसल्स में प्लाक बनने से रोकने और रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद करता है। लेकिन मेनोपॉज़ के बाद शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता है, जिससे पेट के आसपास चर्बी बढ़ना, ब्लड प्रेशर बढ़ना और बैड कोलेस्ट्रॉल में इजाफा जैसी समस्याएं सामने आती हैं। इससे हृदय रोग का खतरा और बढ़ जाता है।
ये भी हैं बड़े कारण
डॉक्टरों के अनुसार हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ बैड कोलेस्ट्रॉल, अधिक वजन, शारीरिक गतिविधि की कमी और स्मोकिंग जैसी आदतें भी महिलाओं में दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ाती हैं। धूम्रपान से रक्त वाहिकाओं की दीवारें कमजोर हो जाती हैं और उनमें प्लाक तेजी से जमा होने लगता है।
एक्सपर्ट्स की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दिल की बीमारियों से बचाव के लिए शुरुआती स्तर पर ही सावधानी जरूरी है। इसके लिए हेल्दी डाइट, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रित रखना और धूम्रपान से दूर रहना बेहद जरूरी है।
डॉक्टरों का मानना है कि समय पर बीमारी की पहचान और सही इलाज से न केवल जोखिम कम किया जा सकता है, बल्कि लंबे समय तक बेहतर स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता भी बनाए रखी जा सकती है।
Author: Deepak Mittal










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