मानवता की सेवा में देहदान, चंद्रिका बाई राजपूत का मरणोपरांत शरीर मेडिकल कॉलेज को समर्पित

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दुर्ग:“शरीर नश्वर है, लेकिन मानवता अमर है” — इस भाव को साकार करते हुए दुर्ग के राजीव नगर, बजरंग चौक निवासी 75 वर्षीय स्व. चंद्रिका बाई राजपूत का मरणोपरांत देहदान संपन्न हुआ। उनके पार्थिव शरीर को चिकित्सा विज्ञान की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के अध्ययन हेतु अभिषेक मिश्रा मेमोरियल मेडिकल कॉलेज, जुनवानी (भिलाई) को सौंपा गया। यह पुनीत कार्य सामाजिक संस्था प्रनाम के माध्यम से परिजनों की सहमति से संपन्न हुआ।

स्व. चंद्रिका बाई राजपूत ने दिसंबर 2017 में संस्था प्रनाम के अध्यक्ष पवन केसवानी की काउंसलिंग के पश्चात देहदान की वसीयत भरी थी। उनके निधन के बाद परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए तत्काल संस्था को सूचना दी। इसके बाद संस्था द्वारा देहदान से जुड़ी सभी आवश्यक कानूनी और कागजी औपचारिकताएं पूर्ण कराई गईं।

देहदान से पूर्व उनके निवास स्थान पर एक संक्षिप्त श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई, जहां नम आंखों से परिजनों और उपस्थितजनों ने उनके इस महान निर्णय को नमन किया। इसके पश्चात उनका पार्थिव शरीर मेडिकल कॉलेज को सौंपा गया।

इस अवसर पर स्व. चंद्रिका बाई राजपूत की पुत्री संध्या राजपूत सहित पवन केसवानी, पवन गुप्ता, अजय होरीलाल राजपूत, प्रगति राजपूत, प्रदीप राजपूत, मीरा राजपूत, लकी राजपूत, प्रीतम राजपूत, धनंजय सिंह राजपूत, भगवान सिंह राजपूत, मालिक राम राजपूत, मनहरण सिंह राजपूत, विक्की राजपूत, बंटी राजपूत और बीजू राजपूत विशेष रूप से उपस्थित रहे।

प्रनाम संस्था का 256वां देहदान

गौरतलब है कि सामाजिक संस्था प्रनाम वर्ष 2008 से देहदान और नेत्रदान के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। संस्था के अध्यक्ष पवन केसवानी ने बताया कि अब तक 2168 से अधिक लोगों को देहदान के लिए प्रेरित कर उनकी वसीयत भरवाई जा चुकी है। स्व. चंद्रिका बाई राजपूत का देहदान संस्था के माध्यम से संपन्न हुआ 256वां देहदान है। यह देहदान मेडिकल छात्रों को मानव शरीर की संरचना समझने और बेहतर डॉक्टर बनने में सहायक होगा।

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Author: Deepak Mittal

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