(जे के मिश्रा ) बिलासपुर: शासकीय भूमि के अनुचित आवंटन और बिल्डरों को लाभ पहुंचाने के आरोपों में दो तहसीलदारों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया तेज हो गई है। कलेक्टर ने तहसीलदार शेषनारायण जायसवाल और शशिभूषण सोनी के निलंबन और विभागीय जांच के लिए संभागीय कमिश्नर को प्रतिवेदन भेजा है।
सरकारी भूमि का अनुचित लाभ जांच के अनुसार, तहसीलदार शेषनारायण जायसवाल और शशिभूषण सोनी ने अपने कार्यकाल के दौरान बिलासपुर में सरकारी जमीन का अनुचित तरीके से बिल्डरों को सौंप दिया था। इनकी कार्रवाई से बिल्डरों को बड़ा लाभ हुआ, और शासकीय संपत्ति का दुरुपयोग हुआ। कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदारों के निलंबन का प्रस्ताव संभागीय कमिश्नर को भेज दिया है।
वर्तमान तैनाती शेषनारायण जायसवाल वर्तमान में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में पदस्थ हैं, जबकि शशिभूषण सोनी इस समय बिलासपुर जिले में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
बिल्डरों के लेआउट निरस्त इन दोनों तहसीलदारों की मिलीभगत से फायदा उठाने वाले तीन बिल्डरों का लेआउट भी अब निरस्त किया जा रहा है। कलेक्टर ने जांच के बाद यह कदम उठाया है ताकि सरकारी भूमि का सही उपयोग हो सके और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर रोक लगाई जा सके।

आगे की कार्रवाई कमिश्नर के द्वारा प्रस्ताव पर मुहर लगने के बाद दोनों तहसीलदारों पर निलंबन और विभागीय जांच की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। कलेक्टर द्वारा की गई इस सख्त कार्रवाई से प्रशासनिक हलकों में खलबली मच गई है।
नियमों का उल्लंघन यह मामला सरकारी नियमों और प्रोटोकॉल के उल्लंघन का है, जिसमें सरकारी जमीन को निजी फायदे के लिए गलत तरीके से सौंपा गया। मामले की पुष्टि के बाद अब प्रशासन सख्त कदम उठाने की तैयारी में है।
Author: Deepak Mittal










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