डीजे पे लगा बैन, जनता बोली मिला चैन, विसर्जन में झलकी संस्कृति…

Picture of Deepak Mittal

Deepak Mittal

निर्मल अग्रवाल  : मुंगेली- पर्यावरण को ध्वनि प्रदूषण से  नुकसान पंहुचा रहे तेज गति से बजने वाले कानफोड़ू डीजे को अंततः प्रतिबंधित कर दिया गया है वही राज्य पर्यावरण संरक्षण मंडल, एसपी, कलेक्टर सभी को आदेश की  अवहेलना करने पर सख्त कार्यवाही  करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

डीजे का तेज साउंड  पशु पक्षियों, जानवरों, व बुजर्गों के लिए खासकर काफी नुकसानदेह था। डीजे पे लगे पूर्ण बैन की खबर मिलते ही जनता ने राहत की सांस ली वही डीजे चालकों पे रोजी रोटी को लेकर सवाल खड़ा हो गया। गणेश विसर्जन, दुर्गा विसर्जन, राजनैतिक कार्यक्रमों, जन्मोत्सव, शादी ब्याह आदि में डीजे का चलन बहुतायत हो चुका था जिसके बिना उक्त आयोजनों को गति नही मिल पाती थी।

एकाएक बैन हुए डीजे से तात्कालिक गणेश विसर्जन के लिए व्यय कर सेटअप तैयार कर रखे डीजे संचालको को बड़ी हानि का सामना करना पड़ा है उनका कहना है कि अचानक लिए इस फैसले से हमारी रोजी रोटी पे सीधा असर पड़ा है। रायपुर, धमतरी कई जगहों पे सीमित समय सीमा आवश्यक नियमों के पालन करते हुए अनुमति मिली है।

कि खबर पर क्षेत्रीय डीजे संचालको ने एक दिन गणेश विसर्जन के लिए अनुमति हेतु  थाना सरगांव व sdm से मांग की गई परन्तु उच्च आदेशों के मद्देनजर अनुमति नही मिल पाई।  गणेश विसर्जन हेतु डीजे के अभाव ने आखिरकार फिर से  संस्कृतियों को जीवंत किया है।

जंहा विसर्जन के दौरान छत्तीसगढ़ की संस्कृतियां करमा,कीर्तन, के साथ ही बैंड की धुन ने लोगों के दिल से डीजे के शोर को हटा थिरकने पे मजबूर कर दिया। फूहड़ औऱ अश्लील गानों  के शोर से परे संस्कृतियों की बानगी ने निश्चित ही बप्पा मोरया के उद्घोष को सही मायने में चरितार्थ किया है।

विसर्जन के दौरान प्रथम बार एक अलग ही उल्लासिता का माहौल देखने को मिला जिसने लोगों को टकटकी लगाए रखने पे मजबूर कर दिया।हालांकि एकाएक डीजे बैन से संचालको को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा
पूर्ण रूप से डीजे के मुख्य व्यापारियों के सीधे पेट पे लात पड़ गयी है और वे इस विषय पर सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने जा रहे।

Deepak Mittal
Author: Deepak Mittal

Leave a Comment

Leave a Comment