नवभारत टाइम्स 24×7.in जिला कांकेर ब्यूरो प्रमुख विक्की सोनी
क्षमता से अधिक स्कूली बच्चों को बैठा रहे ऑटो चालक
*स्कूल वाहनों में जमकर हो रही ओवरलोडिंग*
कांकेर । बच्चे को बेहतर शिक्षा दिलवाने की होड़ में उनकी सुरक्षा की तरफ न अभिभावकों और निजी स्कूलों की ओर से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बच्चों को स्कूल भेजने के लिए वाहनों की सुविधा देने के चक्कर में सभी उनके जीवन को खतरे में डाल देते हैं। कांकेर में भी कुछ ऐसा ही मंजर रोज देखने को मिलता है, जहां पर मारुती वैन, टाटा मैजिक, ऑटो में स्कूली बच्चों को ठूंस-ठूंस कर भरा जा रहा है। इनमें अधिकतर निजी वाहन हैं। ओवरलोडिंग यातायात पुलिस की नाक के नीचे हो रही है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती।
बच्चों को स्कूल लाने और वापस घर छोड़ने के लिए लगाई अधिकतर वैन निजी नंबर की हैं व उनका कोई टैक्सी परमिट भी नहीं है। ऐसे में सरकार को हर महीनों हजारों रुपयों का चुना भी लग रहा है। कांकेर में ही करीब दो दर्जन से अधिक निजी नंबर के वाहन बच्चों को स्कूल लाने और ले जाने के काम में लगाए गए हैं। खास बात यह है कि अभिभावकों को भी यह जानकारी है कि उनका बेटा वाहन पर लटककर जाता है। इसके बाद भी वे ध्यान नहीं देते हैं।
इन वाहनों की कभी भी न तो कांकेर पुलिस चैकिंग करती है और न ही परिवहन विभाग ध्यान दे रहा है। यही वजह है कि ऑटो वाहन संचालक मनमानी कर बच्चों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।
आठ सीटर गाड़ी में 15 से अधिक बच्चे बैठाते हैं
स्कूल जाने और ले जाने के लिए लगाई गई वैनों में बच्चों की दशा देखकर किसी का भी मन पसीज जाएगा। जिस वैन में आठ लोगों के बैठने की जगह है, उनमें पंद्रह से अधिक बच्चों को ठूंसा जाता है। साथ में उनके स्कूल बैग भी होते हैं, जिन्हें या तो गाड़ी के ऊपर रख देते हैं या बच्चों को हाथ में पकड़ कर बैठना पड़ता है। यह सब कुछ स्कूल प्रबंधन के सामने होता है, लेकिन शायद ही कभी किसी ने उन्हें रोकने का प्रयास किया हो। बच्चे ऑटो वाहनों के पीछे और दाएं व बांय लटककर जाते हैं।
*बच्चे कम तो रेट ज्यादा*
अभिभावकों की मानें तो उन्होंने इसे लेकर कई बार वैन के मालिकों से बात करने की कोशिश भी की, लेकिन वे इस स्थिति में किराया बढ़ाने की बात करते हैं। अब ऐसे में उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता है। उनका कहना है कि वर्तमान में वैन वाले उनसे एक हजार से 1200 रुपये किराया प्रतिमाह लेते हैं, लेकिन जब बच्चे की सुविधा के लिए वैन में भीड़ कम करने को कहते हैं तो वे डबल किराए की मांग करते हैं।
Author: Deepak Mittal











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