सुशील कुर्की की वो तीन शर्तें जिन्हें राष्ट्रपति और सेनाध्यक्ष को मानना ही पड़ा, फिर पीएम बनने के लिए हुईं तैयार

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Sushila Karki’s three conditions: नेपाल में हिंसक Gen-Z आंदोलन के बाद आखिरकार देश में राजनीतिक संकट खत्म हो गया है। प्रदर्शनकारी समूह की मांग पर नेपाल की पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की ने अंतरिम सरकार की कमान संभाल ली है।

कार्की ने शुक्रवार देर शाम नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। वहीं, राष्ट्रपति ने प्रतिनिधि सभा को भंग कर दिया है। इस बीच सुशीला कार्की उन तीन शर्तों की चर्चा हो रहा है, जिनको राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और सेनाध्यक्ष अशोक राज सिगडेल की ओर से स्वीकार किए जाने के बाद उन्होंने इस पद को संभालने का फैसला किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की का नाम पिछले कुछ दिनों से सुर्खियों में था, लेकिन इसको लेकर सस्पेंस शुक्रवार रात खत्म हुआ। कार्की अंतरिम प्रधानमंत्री का पद संभालने से पहले कुछ बातों को लेकर स्पष्टता चाहती थीं। ऐसे में उन्होंने राष्ट्रपति पौडेल और सेनाध्यक्ष सिगडेलम्के सामने कुछ शर्तें रखीं। दोनों ने जब शर्तों पर सहमति जतायी , जब जाकर उन्होंने शपथ ली। दरअसल, नेपाल के संविधान में किसी न्यायाधीश की सीधे संसद में एंट्री को लेकर कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में कार्की पहले यह रास्ता निकलवाना चाहती थीं। उन्होंने कहा कि जब तक कानून के एक्सपर्ट्स से परामर्श नहीं हो जाता और यह तय नहीं किया जाता कि किस बिंदु या धारा में बदलाव करके अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त किया जाए, तब तक वह शपथ नहीं लेंगी।

कार्की ने देश में मौजूदा हालातों को देखते हुए तीन बड़ी शर्तें भी रखीं थी। जिनमें पहली शर्त थी कि अंतरिम सरकार बनाने और उनके द्वारा इस सरकार का नेतृत्व करने से पहले संसद (प्रतिनिधि सभा) को भंग किया जाए। जिसे राष्ट्रपति ने भंग कार दिया है। अब 21 मार्च 2026 को नेपाल में आम चुनाव होंगे। कार्की की दूसरी शर्त थी कि उनको अंतरिम प्रधानमंत्री बनाने के लिए विभिन्न दलों के साथ-साथ Gen-Z के युवाओं का भी पूरा समर्थन हासिल हो। तीसरी शर्त में उन्होंने Gen-Z आंदोलन में जान गंवाने वालों की मृत्यु के कारणों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

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Author: Deepak Mittal

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