नहर में हाथ-पैर बांधकर डुबोया, मौत के घाट उतारा… अब उम्रभर की सजा

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धमतरी: सिर्री पुल के पास नहर में युवक की नृशंस हत्या के मामले में कोर्ट ने कड़ा और मिसाल कायम करने वाला फैसला सुनाया है। युवक को हाथ-पैर बांधकर नहर में डुबोकर मारने वाले आरोपी को आजीवन कारावास7 वर्ष का सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। यह फैसला माननीय अपर सत्र न्यायाधीश, द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायालय धमतरी ने सुनाया।

यह सनसनीखेज मामला 9 अक्टूबर 2024 का है, जब ग्राम सिर्री रोड स्थित बड़े नहर में एक अज्ञात युवक का शव मिला था। सूचना पर चौकी बिरेझर पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की। बाद में शव की पहचान किशोर साहू (22 वर्ष) निवासी ग्राम कंडेल के रूप में हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल निरीक्षण में खुलासा हुआ कि मृतक के दोनों हाथ पीछे से और पैर बंधे हुए थे, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि यह एक सुनियोजित हत्या है।

शराब की पार्टी बनी मौत की वजह

पुलिस जांच में सामने आया कि मृतक को अंतिम बार मुकेश साहू (27 वर्ष) निवासी ग्राम गागरा के साथ देखा गया था। हिरासत में सख्ती से पूछताछ करने पर आरोपी टूट गया और उसने हत्या की बात स्वीकार कर ली। आरोपी ने बताया कि शराब पीने के बाद वह किशोर साहू को नहर किनारे ले गया, वहां उसके हाथ-पैर बांधकर पानी में डुबो दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। हत्या के बाद सबूत मिटाने के लिए उसने मोबाइल फोन, नंबर प्लेट और अन्य सामग्री नहर में फेंक दी

आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने घटना में प्रयुक्त सामग्री बरामद की। इसके बाद अपराध क्रमांक 416/24, धारा 103(1) एवं 238 बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया।

बिना प्रत्यक्षदर्शी के भी मजबूत केस

इस केस की सबसे अहम बात यह रही कि

  • मृतक थाना अर्जुनी क्षेत्र का निवासी था

  • हत्या थाना कुरुद क्षेत्र में हुई

  • शव चौकी बिरेझर क्षेत्र से मिला

  • कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं था

इसके बावजूद पुलिस ने वैज्ञानिक पद्धति, परिस्थितिजन्य साक्ष्य, तकनीकी जांच और सटीक विवेचना के आधार पर ऐसा मजबूत केस तैयार किया कि अदालत ने आरोपी को दोषसिद्ध मानते हुए कठोर सजा सुनाई।

पुलिस की विवेचना को मिला सम्मान

इस उत्कृष्ट विवेचना के लिए पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार ने तत्कालीन चौकी प्रभारी निरीक्षक चंद्रकांत साहू को सेवा पुस्तिका में प्रशंसा अंक और 500 रुपये नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया।

यह फैसला न सिर्फ पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने वाला है, बल्कि समाज को यह साफ संदेश भी देता है कि अपराध चाहे कितना ही चालाकी से किया जाए, कानून से बचना नामुमकिन है

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Author: Deepak Mittal

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