कैंसर एक खतरनाक बीमारी है और इसके कई प्रकार है। जिसमें से एक दुर्लभ प्रकार सारकोमा है, जो शरीर के किसी भी हिस्से में शुरू हो जाता है। इसका एक लक्षण रात में दिखाई देता है, जिसे लोग अक्सर थकान समझकर इग्नोर कर देते हैं।
डॉ. अनिल ठाकवानी, हेड और सीनियर कंसल्टेंट, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, शारदा केयर हेल्थसिटी, ग्रेटर नोएडा के मुताबिक भारत दुनिया में कैंसर के सबसे बड़े सेंटर में से एक बनता जा रहा है और 2025 तक करीब 3 करोड़ लोग इससे प्रभावित हो सकते हैं।समस्या यह है कि सारकोमा अक्सर दर्दरहित गांठ के रूप में शुरू होता है, जिसकी वजह से लोग इसे महीनों तक नजरअंदाज करते रहते हैं।कब चलता है इसका पता?
ज्यादातर लोगों को सारकोमा तब पता चलता है जब यह बढ़ चुका होता है। सारकोमा शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है। इसे दो मुख्य भागों में बांटा गया है – बोन (हड्डी) सारकोमा और सॉफ्ट टिशू (मुलायम ऊतक) सारकोमा। सॉफ्ट टिशू सारकोमा सबसे आम है। आज तक करीब 50 प्रकार के सारकोमा पाए जा चुके हैं। बीस साल पहले, सिर्फ 2-3 प्रकार ही जाने जाते थे। अब हर साल एक नया प्रकार खोजा जा रहा है।
अपनी विविधता और कॉम्प्लैक्सिटी की वजह से यह कैंसर डॉक्टरों और पैथोलॉजिस्ट्स के लिए भी एक चुनौती बना रहता है। क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर दिखाई नहीं देते, लोग देर से अस्पताल पहुंचते हैं और इलाज में देरी होती है। भारत में इस बीमारी के बारे में जानकारी की भारी कमी है, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो जाती है।
सारकोमा क्या है?
सारकोमा आम कैंसरों की तरह नहीं होता, जो फेफड़ों या ब्रेस्ट जैसे अंगों को प्रभावित करता है। यह शरीर के जोड़ने वाले टिश्यू जैसे कि मसल्स, बोन, फैट, ब्लड वेन और नसों में शुरू होता है। आसान भाषा में कहें तो यह शरीर के किसी भी हिस्से में शुरू हो सकता है। हालांकि कैंसर के कुल मामलों में सिर्फ 0.6% से 2% यह होता है, लेकिन यह काफी तेजी से बढ़ते हैं और फैलते हैं। यह अक्सर बच्चों, किशोरों और युवाओं को प्रभावित करता है, इसलिए जल्दी पहचानना बहुत ज़रूरी है।
चेतावनी देने वाले लक्षण
- बिना वजह या लगातार हड्डियों में दर्द, खासकर रात के वक्त और लोग इसे थकान की वजह से भी समझ लेते हैं
- सारकोमा की शुरुआतमें आमतौर पर कोई दर्द नहीं होता, इसलिए यह छुपा रहता है। लेकिन कुछ लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है:
- धीरे-धीरे बढ़ने वाली कोई गांठ
- दर्द देने या छूने में सेंसिटिव गांठ
क्योंकि यह शरीर के अंदर गहराई में शुरू हो सकता है, अक्सर तब तक पता नहीं चलता जब तक गांठ बड़ी नहीं हो जाती। इसलिए अगर शरीर में कोई भी असामान्य सूजन या उभार दिखे- चाहे दर्द नहीं हो रहा हो-तो उसे नजरअंदाज ना करें।
जल्दी पहचान क्यों जरूरी है?
जितनी जल्दी सारकोमा की पहचान हो जाती है, सफल इलाज की संभावना उतनी बढ़ जाती है। आमतौर पर डॉक्टर MRI या CT स्कैन करते हैं और फिर बायोप्सी से पुष्टि करते हैं कि यह सारकोमा है या नहीं। कैंसर की किस्म और स्टेज जानने के बाद ही ट्रीटमेंट प्लानिंग की जाती है।
इलाज कैसे होता है?
- सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन को मिलाकर सारकोमा का इलाज किया जाता है।
- ट्यूमर को ऑपरेशन करके निकाला जाता है।
- हड्डी के सारकोमा में कीमोथेरेपी बहुत असरदार होती है, जबकि सॉफ्ट टिशू सारकोमा में रेडिएशन की मदद ली जाती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। एनबीटी इसकी सत्यता, सटीकता और असर की जिम्मेदारी नहीं लेता है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
Author: Deepak Mittal










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