नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बिहार विधानसभा चुनाव नतीजों को रद्द करने की मांग को लेकर रणनीतिकार प्रशांत किशोर की ओर से दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव परिणाम आने के बाद इस तरह की याचिकाएं दायर करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जब जनता किसी को नकार देती है, तो उसके बाद राहत के लिए न्यायिक मंच का सहारा नहीं लिया जा सकता। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि याचिकाकर्ता कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल केवल पब्लिसिटी के लिए कर रहे हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर किसी योजना पर आपत्ति थी, तो उसे चुनाव से पहले चुनौती दी जानी चाहिए थी।
गौरतलब है कि प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने पिछले साल नवंबर में हुए बिहार विधानसभा चुनावों में कुल 238 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन पार्टी एक भी सीट जीतने में असफल रही थी। इसके बाद पार्टी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुनाव नतीजों को रद्द करने की मांग की गई थी।
जन सुराज पार्टी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि सत्ताधारी सरकार ने 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों से पहले कल्याणकारी योजनाओं के तहत मतदाताओं को पैसे बांटे। याचिका में दावा किया गया कि लगभग 36 लाख महिलाओं को 10 हजार रुपये की राशि दी गई, जो चुनावी लाभ के लिए की गई अवैध नीति का हिस्सा थी।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस जनहित याचिका को खारिज करते हुए इसे बिहार हाई कोर्ट भेज दिया। अदालत ने संकेत दिया कि ऐसे मामलों में उचित मंच पर और उचित समय पर ही चुनौती दी जानी चाहिए।
Author: Deepak Mittal








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