श्री हरिहर क्षेत्र ठेलकी द्वीप में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से अस्तित्व संकट में

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निर्मल अग्रवाल ब्यूरो प्रमुख मुंगेली 8959931111

सरगांव: पानी के अत्यधिक दोहन और पर्यावरणीय असंतुलन के कारण सदानीरा के रूप में जानी जाने वाली शिवनाथ नदी मार्च महीने में ही सूख गई है। इस नदी के सूखने से न केवल जल संकट गहराया है, बल्कि श्री हरिहर क्षेत्र ठेलकी द्वीप का अस्तित्व भी गंभीर खतरे में पड़ गया है।

शिवनाथ नदी अपने तीन भागों में विभाजित होकर दो प्रमुख द्वीपों – मदकू और ठेलकी – का निर्माण करती है। पहले ये दोनों द्वीप एक ही थे, लेकिन नदी की एक धारा के मुख्य द्वीप को दो भागों में विभाजित करने से मदकू और ठेलकी दो अलग-अलग द्वीप अस्तित्व में आए।
यह क्षेत्र अपने समृद्ध वनस्पतियों और जैव विविधता के लिए जाना जाता है, लेकिन हाल के वर्षों में यहां पेड़ों की अंधाधुंध कटाई ने द्वीप के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

द्वीप क्षेत्र में उगने वाले विशेष प्रजातियों के वृक्ष, जैसे वरूण, सिरहुट, अकोल और पुत्र जीवा, न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हैं, बल्कि शिवनाथ नदी की बाढ़ से द्वीप को बचाने में भी सहायक होते हैं। लेकिन दुर्भाग्यवश, इन वृक्षों की बेतहाशा कटाई हो रही है, जिससे द्वीप क्षेत्र का प्राकृतिक सुरक्षा कवच धीरे-धीरे नष्ट हो रहा है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो वह दिन दूर नहीं जब शिवनाथ नदी की प्रचंड बाढ़ इस पूरे द्वीप क्षेत्र को अपने साथ बहा ले जाएगी।

आश्चर्यजनक रूप से, इस गंभीर समस्या के बावजूद वन विभाग और राजस्व विभाग पूरी तरह से मौन हैं। उनकी निष्क्रियता से यह संदेह उत्पन्न होता है कि क्या पेड़ों की कटाई में कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों का हाथ है? या फिर शासन-प्रशासन की लापरवाही इस विनाश को और बढ़ावा दे रही है?

एक ओर, सरकार द्वीप क्षेत्र के संरक्षण के लिए लाखों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर, वन संरक्षण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। यदि द्वीप क्षेत्र को बचाना है, तो पेड़ों की कटाई को तत्काल रोका जाना आवश्यक है। साथ ही, वन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो न केवल ठेलकी द्वीप का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा, बल्कि मदकू द्वीप भी इससे प्रभावित हुए बिना नहीं रहेगा।जिसका एकमात्र कारण यह पर्यावरणीय असंतुलन ही होगा । अतः, सरकार और प्रशासन को तुरंत इस समस्या की ओर ध्यान देना चाहिए और आवश्यक नीतियाँ बनाकर ठोस कदम उठाने चाहिए।

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