दल्लीराजहरा में रेत माफिया बेलगाम , प्रशासन बेअसर, नदियों का सीना छलनी, हर दिन लाखों की राजस्व हानि

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दल्लीराजहरा।खनिज नगरी दल्लीराजहरा और डौंडी ब्लॉक सहित जिले के विभिन्न नदी नालों में इन दिनों अवैध रेत उत्खनन और परिवहन के गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। हालात यह हैं कि शासन-प्रशासन की तमाम चेतावनियों और नियमों के बावजूद रेत माफिया बेखौफ होकर खुलेआम नदियों का दोहन कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह कारोबार इस कदर फैल चुका है कि अब रेत “सोने के भाव” बिक रही है, जबकि जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बना हुआ है।

विश्वसनीय स्थानीय सूत्रों के अनुसार, प्रतिदिन 500 से अधिक भारी और छोटे वाहन अवैध रूप से रेत का उत्खनन कर परिवहन कर रहे हैं। हाईवा जैसे भारी वाहनों से बड़े पैमाने पर रेत निकासी की जा रही है, जिससे नदियों की संरचना बुरी तरह प्रभावित हो रही है। हैरानी की बात यह है कि पूरे डौंडी ब्लॉक में एक भी वैध रेत खदान लीज में नहीं है, इसके बावजूद बड़े पैमाने पर खनन जारी है।

छोटे परिवहनकर्ता परेशान, बड़े माफिया सुरक्षित
स्थानीय छोटे वाहन मालिकों का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर वाहन खरीदे हैं और जीविका के लिए रेत परिवहन का सहारा लिया है। लेकिन कार्रवाई केवल छोटे परिवहनकर्ताओं पर होती है, जबकि बड़े और प्रभावशाली माफिया पर कोई हाथ डालने की हिम्मत नहीं दिखाई जाती। इससे क्षेत्र में असंतोष बढ़ता जा रहा है और “फूट डालो, राज करो” जैसी स्थिति बनती जा रही है।

नदियों का हो रहा विनाश, गांवों में बढ़ रहा आक्रोश
डौंडी क्षेत्र के धोतिमटोला, दारूटोला, साल्हे, सिंघनवाही, नर्राटोला, पचेड़ा, पटेली, पेंड्री, सिंघोला, बेलोदा और मंगलतराई सहित बालोद जिले के विभिन्न कई गांवों में नदियों और नालों को बेरहमी से खोदा जा रहा है। ग्रामीणों किशोर कुमार, रोहित, आकाश कुमार, रामलाल का कहना है कि लगातार हो रहे अवैध उत्खनन से जलस्तर गिर रहा है, खेती प्रभावित हो रही है और भविष्य में जल संकट गहराने का खतरा मंडरा रहा है।

एक ग्रामीण किसान रामेश्वर लाल ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा,
“दिन-रात मशीनें चल रही हैं, नदी का स्वरूप खत्म हो रहा है। शिकायत करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती। अगर यही हाल रहा तो आने वाले समय में गांवों में पानी के लिए संकट खड़ा हो जाएगा।”

प्रशासनिक कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित
हालांकि जिम्मेदार अधिकारी समय-समय पर कार्रवाई का दावा करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आती है। अवैध उत्खनन के खिलाफ कभी-कभार दिखावटी कार्रवाई जरूर होती है, लेकिन माफियाओं का नेटवर्क इतना मजबूत है कि उन्हें पहले ही सूचना मिल जाती है और वे मौके से फरार हो जाते हैं।

राजस्व को हर दिन लाखों का नुकसान
अवैध रेत खनन के चलते सरकार को रोजाना लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। एक ही रॉयल्टी पर्ची का इस्तेमाल कर दर्जनों गाड़ियों से रेत परिवहन किया जा रहा है, जिससे नियमों की खुली धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। रेत का अवैध भंडारण कर उसे मनमाने दामों पर बेचा जा रहा है, जिससे माफिया मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।
दल्लीराजहरा और डौंडी क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन केवल राजस्व का नुकसान नहीं, बल्कि पर्यावरण और भविष्य के लिए भी गंभीर खतरा बन चुका है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कड़े कदम उठाकर इस पर रोक लगाता है या फिर रेत माफिया इसी तरह कानून को चुनौती देते रहेंगे।

जिला खनिज अधिकारी प्रवीण चंद्राकर ने कहा कि अवैध उत्खनन और परिवहन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि विभाग लगातार निगरानी कर रहा है और जहां भी शिकायत मिलती है, तत्काल कार्रवाई की जाती है।
उन्होंने आगे कहा,
“यह सही है कि कुछ क्षेत्रों से लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। विभाग ने पूर्व में भी कई वाहनों को जब्त किया है और जुर्माने की कार्रवाई की गई है। अवैध खनन में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो। आने वाले दिनों में संयुक्त टीम बनाकर बड़े स्तर पर अभियान चलाया जाएगा, जिसमें पुलिस और राजस्व विभाग की भी मदद ली जाएगी। तकनीकी निगरानी को और मजबूत किया जा रहा है ताकि माफियाओं की गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।”

स्थिति विस्फोटक होने के आसार
लगातार बढ़ रही अवैध गतिविधियों और प्रशासनिक निष्क्रियता के चलते क्षेत्र में जनाक्रोश बढ़ता जा रहा है। यदि समय रहते सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई, तो हालात बिगड़ सकते हैं और बड़ा जनआंदोलन खड़ा हो सकता है।

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Author: Deepak Mittal

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