फर्जी लोन का बड़ा खेल बेनकाब: 17 पर FIR, मास्टरमाइंड की चाल से लाखों की ठगी , पुलिस सख्त, गिरोह में मचा हड़कंप

Picture of Deepak Mittal

Deepak Mittal

दल्लीराजहरा,दल्लीराजहरा में लोन के नाम पर सुनियोजित तरीके से की जा रही ठगी का एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। फर्जी दस्तावेजों के सहारे फाइनेंस कंपनी को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाने वाले गिरोह के खिलाफ पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए 17 से अधिक आरोपितों पर अपराध दर्ज किया है। इस पूरे मामले ने शहर में सनसनी फैला दी है और आम लोगों के बीच आक्रोश भी देखने को मिल रहा है।


मामले की शुरुआत तब हुई जब कमल मोटर्स के संचालक और ‘अरिष्ट फाइनेंस कंपनी’ के डायरेक्टर विनोद जैन ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जांच में खुलासा हुआ कि वर्ष 2024 के दौरान कई लोगों ने फर्जी नौकरी और आय के दस्तावेज प्रस्तुत कर लोन हासिल किया। शुरुआत में कुछ किस्तें जमा कर भरोसा बनाया गया, लेकिन बाद में भुगतान पूरी तरह बंद कर दिया गया।


कंपनी द्वारा कराई गई आंतरिक जांच में यह सामने आया कि आरोपितों ने खुद को शिक्षा विभाग और फायर सर्विस में कार्यरत बताकर जाली नियुक्ति पत्र और फर्जी सैलरी स्लिप जमा की थी। इस सुनियोजित साजिश के तहत 11 लाख 40 हजार रुपये से अधिक की राशि हड़प ली गई। यह केवल एक साधारण धोखाधड़ी नहीं, बल्कि पूरी प्लानिंग के साथ किया गया आर्थिक अपराध है।


जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इस पूरे गिरोह का संचालन कंपनी के पूर्व कर्मचारी अजय देवांगन और गरियाबंद निवासी एजेंट अमर मरकाम कर रहे थे। आरोप है कि अजय देवांगन ने कंपनी में रहते हुए ही इस ठगी की नींव रखी और नौकरी छोड़ने के बाद भी ग्राहकों से वसूली करता रहा। जब लोगों ने अपनी रकम वापस मांगी, तो उसके द्वारा दिए गए चेक बाउंस हो गए, जिससे पूरे मामले की परतें खुलती चली गईं।


पुलिस ने इस मामले में प्रतिमा यादव, मुस्कान वंदेवार, भागवत प्रसाद साहू, मुकेश कुमार, सूरज कुमार, राकेश उपाध्याय, यादराम निषाद, संतोष कुमार यादव, नरोत्तम तारम, अमन कुमार, जगन लाल, विनोद कुमार निषाद, राहुल उपाध्याय और पूनाराम विश्वकर्मा सहित अन्य को आरोपित बनाया है। सभी के खिलाफ IPC की धारा 420, 467, 468 और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद दल्लीराजहरा में हड़कंप मचा हुआ है। यह मामला एक चेतावनी है कि फर्जीवाड़े के जरिए आसान पैसा कमाने की कोशिश अब सीधे जेल तक पहुंचा सकती है। पुलिस की सख्ती और बढ़ती निगरानी ने साफ कर दिया है कि अब ठगों की खैर नहीं।

नगर पुलिस अधीक्षक विकास पाटले ने कहा कि यह एक संगठित आर्थिक अपराध है, जिसमें कई लोग मिलकर फर्जी दस्तावेजों के जरिए वित्तीय संस्थान को नुकसान पहुंचा रहे थे। पुलिस हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान भी की जा रही है। दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। 17 लोगों के खिलाफ में अपराध दर्ज किया गया है जांच जारी है सूक्षम जांच के बाद और भी नाम सामने आ सकते हैं


विनोद जैन का कहना है कि कंपनी ने नियमों के तहत सभी प्रक्रियाएं पूरी की थीं, लेकिन आरोपितों ने चालाकी से सिस्टम का दुरुपयोग किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की धोखाधड़ी न केवल कंपनी को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि पूरे वित्तीय सिस्टम की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करती है।


स्थानीय लोगों का भी कहना है कि ऐसे मामलों में कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह की ठगी करने की हिम्मत न कर सके। व्यापारिक संगठनों ने भी प्रशासन से मांग की है कि आर्थिक अपराधों पर विशेष निगरानी रखी जाए और दोषियों पर तेजी से कार्रवाई हो।

Deepak Mittal
Author: Deepak Mittal

Leave a Comment

Leave a Comment