Punjab Floods Alert: पंजाब में तबाही मचाती बारिश और बाढ़, गांव डूबे, फसलें बर्बाद, हजारों लोग प्रभावित

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उत्तर भारत में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और नदियों के उफान ने पंजाब को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है. राज्य के कई जिलों में हालात बेहद खराब हैं. कहीं गांव पूरी तरह डूब गए हैं तो कहीं हजारों एकड़ फसलें पानी में समा गई हैं.

अब तक लाखों लोग प्रभावित हो चुके हैं और सरकार ने सेना व एनडीआरएफ की मदद से राहत कार्य तेज कर दिए हैं लेकिन मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और बारिश की चेतावनी दी है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है.

मुख्यमंत्री ने हालात का लिया जायजा

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लिया. अधिकारियों को राहत कार्य और तेज करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी प्राथमिकता लोगों की जान बचाना और उन्हें सुरक्षित जगह पहुंचाना है. इसके लिए राज्य सरकार ने राहत शिविर स्थापित करने का आदेश दिया है.

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार से मदद मांगी गई है ताकि प्रभावित लोगों को तुरंत सहायता मिल सके. अब तक राज्य में कम से कम 7 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला गया है.

इन जिलों में डूब गईं सड़कें, पुल और गांव

बाढ़ ने पंजाब के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है. पठानकोट, कपूरथला और होशियारपुर में भारी बारिश से नदियां उफान पर हैं और कई गांवों में पानी घुस गया है. यहां राहत शिविर लगाए गए हैं.

गुरदासपुर जिले में एक स्कूल पूरा पानी में डूब गया. जहां से बीएसएफ ने 60 लोगों को बचाया. तरन तारन के निचले इलाकों में पानी भर जाने से सड़कें और पुल बंद हो गए हैं. वहीं फाजिल्का जिले में 6 राहत शिविर बनाए गए हैं और गांवों से लगातार लोगों को निकाला जा रहा है.

फिरोजपुर में सतलुज और ब्यास नदियों के उफान से कई इलाके डूब गए और फसलों का भारी नुकसान हुआ. अधिकारियों के मुताबिक राज्य में अब तक करीब 90,884 एकड़ कृषि भूमि बाढ़ की चपेट में आ चुकी है, जिसमें धान, गेहूं और गन्ने की फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं.

बारिश और बाढ़ ने केवल खेत ही नहीं डुबोए, बल्कि कई अहम ढांचे और संपत्तियां भी जलमग्न हो गई हैं. फाजिल्का का मौजम गांव समेत कई इलाकों में पानी भर गया है. हजारों घर जलमग्न हो गए हैं. लोग छतों पर शरण लेने को मजबूर हैं.

सेना और वायुसेना उतरी मैदान में

राहत कार्यों में सेना, एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन पूरी ताकत से जुटे हुए हैं. अब तक 1.5 लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है.

भारतीय वायुसेना ने भी मोर्चा संभाल लिया है. मी-17 और चिनूक हेलीकॉप्टरों की मदद से जम्मू-कश्मीर और पंजाब के बाढ़ग्रस्त इलाकों में भोजन, दवाएं और जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है.

फाजिल्का और फिरोजपुर में 6-6 राहत शिविर बनाए गए हैं, जबकि होशियारपुर में 5 शिविर चल रहे हैं. हालांकि कई जगह लगातार बारिश और सड़कों के टूटने से राहत सामग्री पहुंचाना मुश्किल हो रहा है.

बांधों से छोड़ा गया पानी बढ़ा रहा मुश्किलें

स्थिति को और खराब करने में बांधों से छोड़ा गया पानी भी बड़ा कारण बना है. भाखड़ा बांध से 45,000 क्यूसेक और पोंग बांध से 71,794 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिससे सतलुज, रावी और ब्यास नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं.

किसानों की हालत बदतर

सबसे बड़ा नुकसान किसानों को हो रहा है. धान, गन्ना और गेहूं जैसी फसलें पूरी तरह पानी में डूब गई हैं. किसानों का कहना है कि उन्हें करोड़ों का नुकसान हुआ है. अब उन्होंने सरकार से तुरंत मुआवजे की मांग की है. किसान संगठनों ने कहा है कि अगर जल्दी मदद नहीं मिली तो आने वाले समय में खाद्य संकट भी खड़ा हो सकता है.

आगे और बिगड़ सकते हैं हालात

मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों में और बारिश की भविष्यवाणी की है. अगर ऐसा हुआ तो पहले से भरी नदियों में और उफान आ सकता है. इससे बाढ़ की मार और बढ़ सकती है. राज्य सरकार ने 10 जिलों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है और लोगों से अपील की है कि वे नदियों के पास न जाएं.

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Author: Deepak Mittal

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