नव भारत संकल्प से सिद्धि तक 2026… आशाओं से सजा साल

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नई दिल्ली: नए वैश्विक बाजारों से लेकर गांव-कस्बों की दुकानों तक, भारतीय अर्थव्यवस्था इन दिनों एक ऑलराउंडर की तरह मैदान में जमी हुई है। रणनीतियां बन चुकी हैं, जमीन पर असर दिख रहा है और नतीजों की आहट भी सुनाई देने लगी है। वर्ष 2025 के विदा होते-होते भारत ने ऐसा कारनामा कर दिखाया, जिसने दुनिया को चौंका दिया—जापान को पीछे छोड़कर भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया।

अब भारत की जीडीपी 4.18 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है। अनुमान है कि 2030 तक यह आंकड़ा 7.3 ट्रिलियन डॉलर को छू सकता है। गौर करने वाली बात यह है कि वर्ष 2014 में भारत की जीडीपी करीब 2 ट्रिलियन डॉलर थी, यानी महज 11 वर्षों में 100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि। इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग की मजबूत नींव अब तेज रफ्तार विकास का संकेत दे रही है। जानकार मानते हैं कि यही रफ्तार 2047 के विकसित भारत के सपने को हकीकत में बदल सकती है।

मूडीज से IMF तक, भारत की ग्रोथ पर मुहर

रेटिंग एजेंसी मूडीज के मुताबिक, आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक वृद्धि दर G20 देशों में सबसे तेज रहने वाली है। अनुमान है कि 2026 में ग्रोथ 6.4% और 2027 में 6.5% रहेगी। यही सुर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और ओईसीडी के आकलनों में भी सुनाई देता है।

दुनिया से दोस्ती, भारत की नई रणनीति

भारत की आर्थिक नीति अब ‘एक टोकरी में सारे अंडे’ रखने वाली नहीं रही। ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, ओमान, यूनाइटेड किंगडम से लेकर अफ्रीका और लैटिन अमेरिका तक भारत ने व्यापारिक रिश्तों को नई धार दी है।
खाड़ी देशों के साथ तेल से आगे बढ़कर सप्लाई चेन और निवेश की बात हो रही है। वहीं अर्जेंटीना और ब्राजील जैसे देशों से लिथियम, हाइड्रोकार्बन और रिन्यूएबल एनर्जी में सहयोग बढ़ रहा है। अफ्रीका के साथ भारत अब तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है।

मेक इन इंडिया का असर, भारत बना मैन्युफैक्चरिंग हब

देश के भीतर मेक इन इंडिया और PLI योजना ने तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। कभी मोबाइल निर्माण की सिर्फ 2 इकाइयां थीं, आज 300 से अधिक यूनिट काम कर रही हैं। भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल उत्पादक देश बन चुका है और अमेरिका को सबसे ज्यादा मोबाइल निर्यात करता है।
अब नजर सेमीकंडक्टर और चिप मैन्युफैक्चरिंग पर है। फॉक्सकॉन समेत कई वैश्विक कंपनियों की एंट्री से भारत तकनीकी ताकत बनने की दहलीज पर खड़ा है।

कृषि का बदला चेहरा, खेत से बाजार तक सीधी पहुंच

किसानों के लिए भी तस्वीर बदल रही है। एफपीओ, कोल्ड स्टोरेज, आधुनिक प्रोसेसिंग यूनिट और पीएम किसान संपदा योजना के जरिए कृषि को घाटे से मुनाफे की ओर ले जाने की कोशिश तेज है। फल-सब्जियों में विश्व में दूसरे स्थान पर होने के बावजूद जो 40% नुकसान होता था, उसे कम करने के उपाय अब जमीन पर दिखने लगे हैं।

महिलाएं, सहकारिता और गांवों की नई ताकत

स्वयं सहायता समूह और आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाएं अब हर महीने 7 हजार से 15 हजार रुपये तक कमा रही हैं। वहीं नई राष्ट्रीय सहकारिता नीति का लक्ष्य सहकारी क्षेत्र के जीडीपी योगदान को तीन गुना करना है। डेयरी से आगे बढ़कर अब टैक्सी, बीमा, पर्यटन और हरित ऊर्जा तक सहकारिता का दायरा बढ़ रहा है।

अंतरिक्ष से अर्थव्यवस्था तक, भारत की ऊंची उड़ान

2025 में शुभांशु शुक्ला का अंतरिक्ष में पहुंचना, इसरो के भारी रॉकेट और निजी कंपनियों की एंट्री—ये सब संकेत हैं कि स्पेस सेक्टर भी अब भारत की आर्थिक ताकत बनने जा रहा है। गगनयान और नई अंतरिक्ष नीति ने देश को वैश्विक स्पेस इकॉनमी की दौड़ में आगे कर दिया है।

2026… उम्मीदों का साल

आर्थिक मोर्चे पर मजबूती, वैश्विक भरोसा और देश के भीतर बदला माहौल—2026 भारत के लिए निर्णायक साल बनता दिख रहा है। सवाल बस इतना है—क्या यही वह साल होगा, जब विकसित भारत का सपना और ज्यादा करीब आ जाएगा?

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Author: Deepak Mittal

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