New Delhi: Patiala House Court ने शुक्रवार को Jawaharlal Nehru University (जेएनयू) में हुए विरोध प्रदर्शन के मामले में गिरफ्तार पांच छात्रों को जमानत दे दी। आरोपियों को दिन में हुई नई गिरफ्तारी के बाद अदालत में पेश किया गया था। मामला Vasant Kunj North Police Station में दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने बैरिकेड तोड़ दिए और कथित झड़प में 27 पुलिसकर्मी घायल हो गए। मामले की सुनवाई करते हुए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (जेएमएफसी) अनिमेष कुमार ने आरोपी नेहा, रणविजय, वर्के परक्कल और अभिषेक कुमार को 25,000 रुपये के निजी मुचलके और समान राशि की जमानत पर राहत दी। अदालत ने जमानत को आरोपियों के स्थायी पते के सत्यापन के अधीन रखा।
हालांकि, जमानत बांड तत्काल प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण अदालत ने सभी आरोपियों को 13 मार्च तक 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
बचाव पक्ष का तर्क
अभियुक्त रणविजय सिंह की ओर से पेश अधिवक्ता दीक्षा द्विवेदी ने अदालत में दलील दी कि छात्रों के खिलाफ कोई विशिष्ट और प्रत्यक्ष आरोप नहीं हैं। उन्होंने कहा कि छात्र यूजीसी नियमों और विश्वविद्यालय प्रशासन की कुछ टिप्पणियों के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि परिसर के अंदर छात्रों को बिना किसी निषेधाज्ञा के रोका गया और पुलिस द्वारा विश्वविद्यालय के गेट पर बैरिकेड लगाए गए थे।
वकील ने कहा कि गिरफ्तारी से पूर्व कोई स्पष्ट चेतावनी नहीं दी गई और छात्रों ने किसी प्रकार की हिंसा नहीं की।
पुलिस का पक्ष
जमानत का विरोध करते हुए सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी), वसंत कुंज ने अदालत को बताया कि आरोपी पूर्व में भी विरोध प्रदर्शनों में शामिल रहे हैं, जिनके संबंध में चार अलग-अलग एफआईआर दर्ज हैं। पुलिस ने आरोप लगाया कि करीब 300–350 लोगों का समूह बिना अनुमति इंडिया गेट की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहा था। कानून-व्यवस्था की स्थिति समझाने पर प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर हिंसक रुख अपनाया।
अदालत की टिप्पणी
जमानत देते हुए मजिस्ट्रेट अनिमेष कुमार ने कहा कि ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों पर हमला गंभीर विषय है, जिसे शांतिपूर्ण विरोध के नाम पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, अदालत ने यह भी माना कि आरोपित धाराओं में अधिकतम पांच वर्ष की सजा का प्रावधान है और आरोपी छात्र हैं, जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं बताया गया है।
मामले में आगे की सुनवाई निर्धारित तिथि पर होगी।
Author: Deepak Mittal








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