सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि सभी राज्य रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) के गठन और उसकी कार्यप्रणाली पर पुनर्विचार करें। अदालत ने कहा कि यह संस्था अपने मूल उद्देश्य को पूरा करने में विफल रही है और डिफॉल्ट करने वाले बिल्डरों की मदद करने के अलावा कुछ नहीं कर रही है।
अदालत ने कहा कि रेरा जिन घर खरीदारों और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए बनाई गई थी, वे आज पूरी तरह निराश और हताश हैं। यदि यह संस्था अपने उद्देश्य में असफल साबित हो रही है, तो इसे समाप्त कर देना ही बेहतर होगा—इससे अदालत को कोई आपत्ति नहीं होगी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ ने ये टिप्पणियां हिमाचल प्रदेश सरकार को रेरा कार्यालय अपनी सुविधा के अनुसार स्थानांतरित करने की अनुमति देते हुए कीं। पीठ ने हिमाचल प्रदेश सरकार सहित अन्य पक्षकारों की उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें रेरा कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने के मामले में Himachal Pradesh High Court के आदेश को चुनौती दी गई थी।
इससे पहले हाईकोर्ट ने जून 2025 की उस अधिसूचना पर रोक लगा दी थी, जिसमें रेरा कार्यालय के स्थानांतरण का निर्णय लिया गया था। बाद में 30 दिसंबर 2025 के आदेश में भी अंतरिम रोक जारी रखने के निर्देश दिए गए थे। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के इस आदेश पर रोक लगा दी है।
Author: Deepak Mittal









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