बीज निगम में बढ़ता आक्रोश: प्रबंध संचालक की कार्यशैली से नियमित अधिकारी-कर्मचारी परेशान, पूरे प्रदेश में असंतोष का माहौल

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Deepak Mittal

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम में इन दिनों अंदरूनी असंतोष लगातार गहराता जा रहा है। निगम के नियमित अधिकारी एवं कर्मचारियों के बीच प्रबंधन की कार्यप्रणाली को लेकर भारी नाराजगी व्याप्त है। प्रदेश के सभी 33 जिलों में पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच आक्रोश का माहौल देखने को मिल रहा है।

नियमित कर्मचारियों का आरोप है कि निगम के वर्तमान प्रबंध संचालक अजय कुमार अग्रवाल के नकारात्मक रवैये और कार्यशैली के कारण पूरा विभाग मानसिक दबाव में कार्य करने को मजबूर हो गया है।


नियमित अधिकारी-कर्मचारियों का कहना है कि निगम में लगातार भय और दबाव का वातावरण निर्मित किया जा रहा है। छोटी-छोटी बातों पर नोटिस जारी करना, बार-बार स्पष्टीकरण मांगना, स्थानांतरण की धमकी देना, निलंबन की कार्रवाई करना तथा अत्यधिक कार्यभार डालना अब सामान्य स्थिति बन चुकी है। कर्मचारियों का आरोप है कि कई बार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार भी किया जाता है, जिससे विभागीय वातावरण पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया है।

नियमित कर्मचारियों के अनुसार निगम में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी वर्षों से किसानों के हित में पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य करते आ रहे हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में कर्मचारियों का मनोबल लगातार टूटता जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सकारात्मक संवाद और सहयोगात्मक कार्यशैली के बजाय दबाव और डर का माहौल बनाकर काम कराया जा रहा है, जिसका असर विभागीय कार्यप्रणाली पर भी पड़ने लगा है।

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार कई अधिकारी-कर्मचारी मानसिक तनाव में कार्य कर रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक दबाव के कारण खुलकर सामने आने से बच रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि विभाग में लगातार असुरक्षा की भावना बढ़ती जा रही है। बार-बार नोटिस और कार्रवाई की आशंका के चलते अधिकारी एवं कर्मचारी भय के माहौल में काम कर रहे हैं। निगम के अंदर यह चर्चा भी तेज है कि वर्तमान कार्यशैली से विभागीय समन्वय पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।


गौरतलब है कि बीज निगम राज्य शासन का महत्वपूर्ण उपक्रम है, जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों को प्रमाणित एवं उच्च गुणवत्ता वाले बीज तथा कृषि उपकरण उपलब्ध कराना है। वहीं निगम का संचालन रायपुर के तेलीबांधा क्षेत्र स्थित मिनोचा पेट्रोल पंप के पास स्थित कार्यालय से भी किया जाता है। ऐसे महत्वपूर्ण विभाग में लगातार बढ़ते कर्मचारी असंतोष को लेकर अब कई सवाल खड़े होने लगे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यदि समय रहते कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ, तो इसका सीधा असर विभागीय कार्यों और किसानों से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी पड़ सकता है।


इधर निगम में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी भी अपनी दो सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे हुए हैं। आंदोलनरत कर्मचारियों की प्रमुख मांग दिसंबर माह से बंद की गई 4000 रुपये की “श्रम सम्मान निधि” को पुनः प्रारंभ करने तथा आकस्मिक मृत्यु होने पर 50 हजार रुपये सहायता राशि देने की है। कर्मचारियों का आरोप है कि उनकी वर्षों पुरानी सुविधाओं को बिना किसी स्पष्ट आदेश के बंद कर दिया गया है, जिससे आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया है कि आंदोलन को कमजोर करने के लिए विभिन्न स्तरों पर दबाव बनाया जा रहा है। वहीं कई बीज भंडारण केंद्रों में हड़ताल का असर भी दिखाई देने लगा है। कर्मचारियों ने स्पष्ट कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।


कर्मचारियों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। कर्मचारियों ने शासन एवं निगम प्रबंधन से शीघ्र सकारात्मक पहल करने की मांग की है, ताकि निगम में बेहतर कार्य वातावरण स्थापित हो सके।

कृषि मंत्री रामविचार नेताम का वर्जन :
“मामले की जानकारी ली जा रही है। कर्मचारियों की समस्याओं पर शासन स्तर पर चर्चा कर उचित निर्णय लेने का प्रयास किया जाएगा।”

प्रबंध संचालक अजय कुमार अग्रवाल का वर्जन :
“निगम का कार्य प्रशासनिक नियमों और पारदर्शिता के साथ संचालित किया जा रहा है। कर्मचारियों की समस्याओं पर नियमानुसार विचार किया जाएगा।”

नियमित अधिकारी-कर्मचारियों का वर्जन :
“विभाग में लगातार दबाव और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। अधिकारी-कर्मचारी मानसिक तनाव में कार्य करने को मजबूर हैं। यदि कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।”

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Author: Deepak Mittal

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