जूनियर वकीलों के मासिक स्टाइपेंड की मांग पर हाईकोर्ट गंभीर; पढ़ें राज्य सरकार का जवाब

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(जे के मिश्र, जिला ब्यूरो) : बिलासपुर – छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जूनियर वकीलों के लिए मासिक स्टाइपेंड की मांग पर दायर याचिका पर राज्य सरकार, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और छत्तीसगढ़ राज्य बार काउंसिल को गंभीरता से कार्यवाही करने का निर्देश दिया है। राज्य सरकार ने अपने जवाब में बताया कि इस संबंध में एक प्रस्ताव विधि मंत्रालय को भेजा गया है, लेकिन वहां से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

याचिकाकर्ताओं की मांग और तर्क

याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में कहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य में जूनियर वकीलों को मासिक स्टाइपेंड के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए उचित नियम बनाए जाने चाहिए। उनका तर्क है कि झारखंड, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश और केरल राज्यों में पहले से ही जूनियर वकीलों को स्टाइपेंड देने के लिए नियम बनाए गए हैं।

वकीलों के नामांकन और वित्तीय सहायता की आवश्यकता

याचिकाकर्ताओं ने बताया कि वकीलों को राज्य बार काउंसिल में नामांकन के लिए लगभग 16,000 रुपये का भुगतान करना पड़ता है। हालांकि, प्रारंभिक प्रैक्टिस के कठिन समय के दौरान जूनियर वकीलों की मदद करने का कोई प्रावधान नहीं है। उनका कहना है कि वित्तीय संकट के कारण कई प्रतिभाशाली कानून स्नातक मुकदमेबाजी के क्षेत्र से दूर हो रहे हैं।

अन्य राज्यों के नियमों का उदाहरण

याचिका में बताया गया है कि 2016 में झारखंड स्टेट बार काउंसिल ने न्यू एडवोकेट्स स्टाइपेंड रूल्स को अधिसूचित किया था। 2020 में पुडुचेरी सरकार ने “जूनियर एडवोकेट्स स्कीम रूल्स” के तहत स्टाइपेंड देने का प्रावधान किया। आंध्र प्रदेश सरकार ने भी जूनियर वकीलों को 5000 रुपये मासिक स्टाइपेंड देने का आदेश पारित किया।

इस मामले में हाईकोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को निर्देश दिया है कि वे इस मामले में गंभीरता से कार्यवाही करें और जूनियर वकीलों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए उचित कदम उठाएं।

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