धोखाधड़ी रोकने सरकार का बड़ा कदम, मृत लोगों के 2.5 करोड़ से ज्यादा आधार नंबर किए गए डीएक्टिवेट

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नई दिल्ली: पहचान से जुड़ी धोखाधड़ी रोकने और कल्याणकारी योजनाओं में गड़बड़ी पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बुधवार को संसद में जानकारी दी कि अब तक 2.5 करोड़ से अधिक मृत व्यक्तियों के आधार नंबर डीएक्टिवेट किए जा चुके हैं।

मंत्री ने बताया कि आधार दुनिया का सबसे बड़ा बायोमेट्रिक पहचान सिस्टम है, जिसमें करीब 134 करोड़ सक्रिय आधार धारक हैं। उन्होंने कहा कि आधार डेटाबेस की सटीकता और अखंडता बनाए रखने के उद्देश्य से भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा देशव्यापी सफाई अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत मृत व्यक्तियों के आधार नंबर निष्क्रिय किए गए हैं।

जितिन प्रसाद ने कहा कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके आधार नंबर को डीएक्टिवेट करना जरूरी है, ताकि पहचान धोखाधड़ी या कल्याणकारी योजनाओं के दुरुपयोग को रोका जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आधार डेटाबेस में दर्ज पता और मृत्यु दर्ज होने वाला राज्य या केंद्र शासित प्रदेश अलग-अलग हो सकते हैं।

धोखाधड़ी रोकने के लिए कई सुरक्षा उपाय

मंत्री ने संसद को बताया कि पहचान धोखाधड़ी के जोखिम को कम करने और लाभों की लीक-प्रूफ डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए UIDAI ने कई तकनीकी और प्रशासनिक उपाय लागू किए हैं। इनमें—

  • बायोमेट्रिक लॉक/अनलॉक सुविधा, जिससे आधार धारक अपने बायोमेट्रिक्स को सुरक्षित कर सकते हैं

  • लाइवनेस डिटेक्शन के साथ फेस ऑथेंटिकेशन, जिससे लाभार्थी की वास्तविक उपस्थिति सुनिश्चित होती है

  • आधार सिक्योर QR कोड, पेपरलेस ऑफलाइन ई-केवाईसी और ई-आधार के जरिए ऑफलाइन पहचान सत्यापन

  • सभी संस्थाओं के लिए आधार डेटा वॉल्ट का अनिवार्य उपयोग, ताकि डेटा एन्क्रिप्टेड रूप में सुरक्षित रहे

उन्होंने स्पष्ट किया कि UIDAI किसी भी स्थिति में आधार धारकों की मूल बायोमेट्रिक जानकारी साझा नहीं करता। इसके अलावा नियमित डेटाबेस सैनिटाइजेशन, डी-डुप्लीकेशन और मृत व्यक्तियों के आधार नंबरों को डीएक्टिवेट करने की प्रक्रिया जारी है।

UIDAI ने हाल ही में एक नया आधार ऐप भी लॉन्च किया है, जिससे आधार धारक ऑफलाइन सत्यापन चाहने वाली संस्थाओं के साथ अपने सत्यापित क्रेडेंशियल सुरक्षित और आसान तरीके से साझा कर सकेंगे।

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Author: Deepak Mittal

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