ED बनाम राज्य सरकार! I-PAC छापेमारी पहुंची सुप्रीम कोर्ट, एजेंसी बोली—जांच में रोड़ा बनी बंगाल मशीनरी

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नई दिल्ली: कोलकाता में I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) के दफ्तर और सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर हुई छापेमारी का मामला अब सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल करते हुए राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार ने भी अपने पक्ष को सुरक्षित रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर दी है।

ED का बड़ा आरोप—राज्य मशीनरी ने रोकी निष्पक्ष जांच

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में ईडी ने कहा है कि निष्पक्ष जांच करने के उसके संवैधानिक अधिकारों में राज्य प्रशासन ने हस्तक्षेप किया। एजेंसी का दावा है कि कोलकाता में छापेमारी के दौरान जो घटनाक्रम हुआ, उसने जांच की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इसी आधार पर ईडी ने इस पूरे मामले की CBI जांच की मांग की है।

हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा

इससे पहले ईडी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में तत्काल सुनवाई की गुहार लगाई थी, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति घोष की एकल-न्यायाधीश पीठ द्वारा निर्धारित तिथि पर ही होगी।
ईडी ने यह भी दलील दी कि यदि 14 जनवरी से पहले सुनवाई संभव न हो, तो मामला किसी अन्य पीठ को सौंपा जाए, लेकिन यह मांग भी अदालत ने ठुकरा दी।

छापेमारी के बीच ममता बनर्जी की एंट्री से बढ़ा बवाल

पूरा विवाद उस वक्त और गंभीर हो गया, जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद छापेमारी के दौरान I-PAC के दफ्तर और प्रतीक जैन के घर पहुंच गईं।
ईडी का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने ईडी अधिकारियों से कुछ अहम दस्तावेज ले लिए और उन्हें अपनी गाड़ी में रखवाया, जिससे जांच प्रक्रिया प्रभावित हुई।

TMC का पलटवार—चुनावी रणनीति चुराने की साजिश

वहीं, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने ईडी पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का आरोप है कि

I-PAC पार्टी की मतदाता रणनीति एजेंसी के रूप में काम कर रही है और ईडी की कार्रवाई का मकसद विधानसभा चुनाव से जुड़ी रणनीतिक फाइलें जब्त कर उन्हें भाजपा के साथ साझा करना है।

हालांकि, ईडी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि एजेंसी कानून के तहत अपनी कार्रवाई कर रही है।

अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर

अब यह मामला देश की सर्वोच्च अदालत के पाले में है, जहां तय होगा कि

  • क्या राज्य सरकार ने केंद्रीय एजेंसी के अधिकारों में दखल दिया?

  • क्या मामले की जांच CBI को सौंपी जाएगी?

  • और क्या यह छापेमारी कानून बनाम राजनीति की नई जंग का उदाहरण बनेगी?

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