मुंबई: देश में डिजिटल भुगतान को लेकर तेजी से बढ़ते रुझान के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का डिजिटल पेमेंट इंडेक्स (DPI) पहली बार 500 के पार पहुंच गया है। सितंबर 2025 तक यह सूचकांक बढ़कर 516.76 पर पहुंच गया, जो मार्च 2025 में 493.22 था।
केंद्रीय बैंक के अनुसार, आरबीआई-डीपीआई में इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण देशभर में भुगतान प्रदर्शन और भुगतान को सक्षम बनाने वाले कारकों में मजबूत वृद्धि है। आरबीआई 1 जनवरी 2021 से डिजिटल पेमेंट इंडेक्स प्रकाशित कर रहा है, जिसमें मार्च 2018 को आधार वर्ष (100 अंक) माना गया है। मार्च 2019 में यह सूचकांक बढ़कर 153.47 हो गया था। वर्ष 2021 से यह इंडेक्स हर छह महीने में जारी किया जाता है और पिछले कुछ वर्षों में इसमें लगातार तेज वृद्धि देखी गई है।
पांच प्रमुख मापदंडों पर आधारित है इंडेक्स
डिजिटल पेमेंट इंडेक्स पांच व्यापक मापदंडों पर आधारित है—
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भुगतान प्रदर्शन (45 प्रतिशत भार)
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भुगतान को सुगम बनाने वाले कारक (25 प्रतिशत)
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मांग पक्ष का भुगतान अवसंरचना (10 प्रतिशत)
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आपूर्ति पक्ष का भुगतान अवसंरचना (10 प्रतिशत)
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उपभोक्ता केंद्रितता (5 प्रतिशत)
इन सभी मापदंडों के तहत कई उप-मापदंड और मापने योग्य संकेतक शामिल हैं, जिनके आधार पर देश में डिजिटल भुगतान के विस्तार और प्रसार का आकलन किया जाता है।
यूपीआई की बड़ी भूमिका
देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में Unified Payments Interface (यूपीआई) की अहम भूमिका रही है। International Monetary Fund (आईएमएफ) ने अपनी जून 2025 की रिपोर्ट ‘ग्रोइंग रिटेल डिजिटल पेमेंट्स (द वैल्यू ऑफ इंटरऑपरेबिलिटी)’ में यूपीआई को लेनदेन की मात्रा के आधार पर दुनिया की सबसे बड़ी खुदरा त्वरित भुगतान प्रणाली बताया है।
वहीं, ACI Worldwide की ‘प्राइम टाइम फॉर रियल-टाइम 2024’ रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक रियल-टाइम भुगतान में यूपीआई की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है और 129.3 बिलियन लेनदेन के साथ यह शीर्ष स्थान पर है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ब्राजील 14 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी और 37.4 बिलियन लेनदेन के साथ दूसरे स्थान पर, थाईलैंड 8 प्रतिशत हिस्सेदारी और 20.4 बिलियन लेनदेन के साथ तीसरे स्थान पर तथा चीन 6 प्रतिशत हिस्सेदारी और 17.2 बिलियन लेनदेन के साथ चौथे स्थान पर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल अवसंरचना के विस्तार, स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच और यूपीआई जैसी सहज प्रणाली के कारण भारत में डिजिटल भुगतान का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
Author: Deepak Mittal









