NCERT–SCERT किताबें अनिवार्य करने के फैसले पर सवाल, हाईकोर्ट के पुराने आदेशों का हवाला
छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली किताबों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। राज्य सरकार के 24 अप्रैल 2026 के आदेश के बाद छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने खुलकर विरोध दर्ज कराया है। आदेश में CBSE स्कूलों में NCERT और राज्य बोर्ड से जुड़े निजी स्कूलों में SCERT की किताबें अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।


इस फैसले के खिलाफ छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने 5 मई 2026 को मुख्य सचिव को पत्र लिखकर आदेश निरस्त करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि यह निर्णय निजी स्कूलों की स्वायत्तता पर सीधा हस्तक्षेप है।
छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने अपने पत्र में कहा है कि यह आदेश छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के पूर्व फैसलों के विपरीत है। वर्ष 2025 में हाईकोर्ट ने WPC 3957/2025 और WPC 2345/2022 मामलों में सरकारी किताबों को अनिवार्य करने संबंधी आदेशों को रद्द कर दिया था।
संगठन ने बताया कि इस शैक्षणिक सत्र में सरकारी किताबों की आपूर्ति समय पर नहीं हो सकी। कई स्कूलों को 25 जुलाई तक किताबें मिलीं, जिससे लगभग डेढ़ महीने तक पढ़ाई प्रभावित रही। इस दौरान स्कूलों को बाजार में उपलब्ध अन्य पुस्तकों से पढ़ाई करानी पड़ी।
छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने यह भी आरोप लगाया कि SCERT की कई किताबों का सिलेबस पिछले 20 वर्षों से अपडेट नहीं हुआ है। इसके अलावा EVS, GK, वैल्यू एजुकेशन, कंप्यूटर, इंग्लिश ग्रामर और हिंदी व्याकरण जैसे विषयों की किताबें SCERT द्वारा प्रकाशित नहीं की जातीं।
नर्सरी से कक्षा दूसरी तक की कक्षाओं के लिए भी कोई आधिकारिक किताब उपलब्ध नहीं है, जबकि इन कक्षाओं का संचालन निजी स्कूलों में बड़े स्तर पर किया जाता है।
छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि:
आदेश को तत्काल निरस्त किया जाए
स्कूलों को अपनी जरूरत के अनुसार किताबें चुनने की स्वतंत्रता दी जाए
पूरे प्रदेश के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं
Author: Deepak Mittal










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