सहमति से बने शारीरिक संबंध को रेप नहीं माना जा सकता: हाईकोर्ट

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बिलासपुर: Chhattisgarh High Court ने शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने के एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि महिला बालिग है और उसकी सहमति से संबंध बने हैं, तो इसे रेप नहीं माना जा सकता। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को अवैध ठहराते हुए आरोपी युवक को बरी कर दिया।

यह फैसला न्यायमूर्ति N. K. Vyas की एकलपीठ ने सुनाया। कोर्ट ने कहा कि मामले में उपलब्ध साक्ष्यों से यह स्पष्ट होता है कि दोनों के बीच संबंध सहमति से बने थे, इसलिए इसे दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

मामला Surguja district के Dhaurpur थाना क्षेत्र से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार वर्ष 2000 में युवती 12वीं कक्षा की छात्रा थी और धौरपुर में किराए के मकान में रहती थी। इसी दौरान लीना राम ध्रुव नामक युवक से उसकी दोस्ती हुई, जो बाद में प्रेम संबंध में बदल गई।

युवती ने आरोप लगाया था कि 8 सितंबर 2000 को युवक ने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और करीब तीन साल तक संबंध बनाता रहा। पढ़ाई पूरी होने के बाद दोनों अपने-अपने गांव लौट गए। युवती के अनुसार, दोनों के बीच हर महीने मिलने का भी तय हुआ था और वह एक सप्ताह तक युवक के घर भी रही, जहां उसे पत्नी की तरह रखा गया।

शिकायत के मुताबिक 16 मई 2003 को युवती फिर युवक के घर गई और वहीं ठहरी। इस दौरान उसने शादी का प्रस्ताव रखा, लेकिन 11 जून 2003 को युवक उसे छोड़कर कहीं चला गया और वापस नहीं लौटा। इसके बाद युवती ने उसके खिलाफ मामला दर्ज कराया।

लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि दोनों के बीच संबंध सहमति से बने थे और पीड़िता उस समय बालिग थी। अदालत ने इसी आधार पर निचली अदालत के फैसले को रद्द करते हुए आरोपी को करीब 20 साल बाद राहत देते हुए बरी कर दिया।

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Author: Deepak Mittal

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