बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल बिलासपुर सिम्स की अव्यवस्था एक बार फिर सामने आ गई है। तेंदूभाठा से आई एक गर्भवती महिला ने अस्पताल के फर्श पर ही बच्चे को जन्म दे दिया, क्योंकि कर्मचारियों ने उसे समय पर भर्ती नहीं किया। प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला के लिए अस्पताल की लापरवाही किसी डरावने सपने से कम नहीं रही।
दस्तावेजों में उलझा सिस्टम, फर्श पर हुआ प्रसव
शुक्रवार सुबह गर्भवती महिला को प्रसव के लिए सिम्स लाया गया था। बताया जा रहा है कि दस्तावेज जांच और औपचारिकताओं में कर्मचारियों की लेटलतीफी के कारण उसे लेबर वार्ड में भर्ती करने में देर होती रही। इसी दौरान महिला की हालत तेजी से बिगड़ गई और परिजनों की आंखों के सामने ही फर्श पर प्रसव हो गया। अचानक हुई इस घटना से अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
लेबर वार्ड पर जबरदस्त दबाव
सिम्स में इन दिनों लेबर वार्ड पर अत्यधिक दबाव बना हुआ है। जिला अस्पताल समेत अन्य स्वास्थ्य केंद्रों से रोजाना 10 से अधिक गर्भवती महिलाओं को बिना इलाज के सीधे सिम्स रेफर किया जा रहा है, जिससे यहां की व्यवस्था चरमरा गई है। सीमित संसाधन और बढ़ती संख्या के कारण मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा।
प्रसव के बाद आनन-फानन में वार्ड शिफ्ट
फर्श पर प्रसव होने के बाद अस्पताल कर्मचारियों ने महिला और नवजात को तुरंत लेबर वार्ड में शिफ्ट किया। फिलहाल मां और बच्चा सुरक्षित बताए जा रहे हैं, लेकिन यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
कब सुधरेगा सिस्टम?
सरकारी अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव को लेकर किए जा रहे दावों के बीच यह घटना झकझोर देने वाली है। सवाल यह है कि
क्या अब भी कागजी कार्रवाई इंसानी जान से ज्यादा अहम रहेगी?
और क्या सिम्स जैसी संस्थाओं में ऐसी घटनाएं किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही हैं?
बिलासपुर सिम्स की यह तस्वीर स्वास्थ्य तंत्र के उस कड़वे सच को उजागर करती है, जहां एक मां को अस्पताल में भी सम्मान और सुरक्षा के लिए जूझना पड़ रहा है।
Author: Deepak Mittal









