CG BREAKING: आबकारी घोटाला मामले में अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर को हाईकोर्ट से जमानत

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Deepak Mittal

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित आबकारी घोटाला मामले में बड़ा न्यायिक घटनाक्रम सामने आया है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने लंबे समय से न्यायिक हिरासत में बंद पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा और कारोबारी अनवर ढेबर को जमानत दे दी है। जस्टिस अरविंद वर्मा की सिंगल बेंच ने बुधवार को आदेश सुनाया। अदालत ने अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर के साथ यश पुरोहित, नितेश पुरोहित और दीपेंद्र चावला को भी राहत प्रदान की है।

आरोपियों की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा और शशांक मिश्रा ने पैरवी की। मामले की पूर्व में विस्तृत सुनवाई हो चुकी थी और कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब जारी आदेश को इस मामले में अहम मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।

22 महीने से थे न्यायिक हिरासत में

पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर समेत अन्य आरोपी करीब 22 महीनों से जेल में बंद थे। सत्र न्यायालय से जमानत याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था, जहां पहले भी राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन वहां से भी जमानत नहीं मिल सकी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पांच महीने बाद पुनः हाईकोर्ट में आवेदन करने की स्वतंत्रता दी थी। उसी आधार पर दोबारा दायर याचिका पर अब यह राहत मिली है।

फिलहाल नहीं होगी रिहाई

जमानत आदेश के बावजूद अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर को तुरंत जेल से रिहाई नहीं मिल सकेगी। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने दोनों को 550 करोड़ रुपए के कथित डीएमएफ घोटाले में भी आरोपी बनाया है। उस मामले में जमानत न मिलने के कारण उनकी रिहाई फिलहाल संभव नहीं है। वहीं, नितेश पुरोहित, दीपेंद्र चावला और यश पुरोहित के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।

क्या है 3200 करोड़ का आबकारी घोटाला?

यह कथित घोटाला राज्य में 2019 से 2023 के दौरान लागू शराब नीति से जुड़ा है। जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) का दावा है कि शराब नीति में बदलाव कर कुछ विशेष आपूर्तिकर्ताओं को लाभ पहुंचाया गया। आरोप है कि अधिकारियों और नेताओं का एक सिंडिकेट बनाकर करीब 3200 करोड़ रुपए का घोटाला किया गया।

जांच में सामने आया कि नकली होलोग्राम और सील तैयार कर महंगी शराब की बोतलें सरकारी दुकानों के जरिए बेची गईं। ये होलोग्राम कथित रूप से नोएडा की एक कंपनी से बनवाए गए थे। नकली होने के कारण बिक्री का पूरा रिकॉर्ड शासन तक नहीं पहुंचता था और बिना एक्साइज टैक्स चुकाए शराब की बिक्री होती रही। इससे राज्य शासन को लगभग 2165 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान होने का दावा किया गया है।

किन-किन पर हुई कार्रवाई?

मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल, अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर सहित कई कारोबारी और अधिकारी आरोपी बनाए गए हैं। आबकारी विभाग के 28 अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी, जिन्हें बाद में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है।

ईडी की कार्रवाई के बाद उसके पत्र के आधार पर आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने भी एफआईआर दर्ज की थी। जांच में नितेश पुरोहित, अरविंद सिंह, दीपेंद्र चावला और सौम्या चौरसिया सहित अन्य नाम भी सामने आए।

राजनीतिक और कानूनी असर

आबकारी घोटाला छत्तीसगढ़ की राजनीति का सबसे चर्चित मामलों में से एक रहा है। विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठा। विपक्ष ने इसे बड़ा भ्रष्टाचार बताते हुए तत्कालीन सरकार पर निशाना साधा, जबकि कांग्रेस ने आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया।

अब हाईकोर्ट से मिली जमानत के बाद मामले में कानूनी प्रक्रिया का नया चरण शुरू होगा। अंतिम फैसला ट्रायल कोर्ट में साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर होगा।

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Author: Deepak Mittal

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