यमन से आया मौत का बुलावा: Nimisha Priya क्यों फंसी फांसी के फंदे तक? पूरी कहानी और आखिरी उम्मीद

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Deepak Mittal

ई दिल्ली : कभी-कभी किस्मत ऐसी सजा देती है, जिसके लिए ना तो कोई कोर्ट होता हैhellip; और ना ही कोई दलील। आज की कहानी दो औरतों से जुड़ी हैhellip; एक वो, जिसने गलती की या हालात के चलते ऐसा हुआ mdash; और अब उसका नाम इतिहास में लिखा जाएगा एक सजा के साथ और दूसरीhellip; जिसे ये सजा मिल चुकी हैhellip; हमेशा के लिए।

एक नाम mdash; निमिषा प्रियाhellip;केरल की रहने वाली, एक आम नर्सhellip; जिसने सपनों के साथ कदम रखा था यमन की ज़मीन परhellip; लेकिन आज वही जमीन उसे फांसी पर लटकाने जा रही है। दूसरा नाम mdash; शहजादी खानhellip;उत्तर प्रदेश की बेटी, जिसने यूएई में अपनी ज़िंदगी खो दीhellip; अदालत ने उसे सजा दीhellip; फांसी पर लटका दिया गयाhellip; बीते 15 फरवरी को।

सवाल उठता हैhellip;
विदेश जाकर जुर्म करना, मजबूरी थी? या ये जाल खुद ही बुनाhellip; और अब फंस चुकी हैं इन हालातों में?

केस 1 – निमिषा प्रियाhellip; मौत से दो कदम दूर

16 जुलाईhellip; तारीख मुकर्रर हो चुकी है। यमन की जेल में बंद है निमिषा प्रिया।
इल्जाम mdash; अपने बिजनेस पार्टनर की हत्या।
हत्या के बाद लाश के टुकड़े करhellip; पानी के टैंक में फेंकने का आरोप।

हालांकि परिवार का दावा कुछ और है। वो कहते हैंhellip; निमिषा तो सिर्फ अपना पासपोर्ट वापस पाना चाहती थी। इंजेक्शन दियाhellip; लेकिन ओवरडोज से मौत हो गई।

सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाईhellip;
भारत की सरकार पर दबावhellip; ब्लड मनी का ऑप्शन तलाशा जा रहा है। यानी पीड़ित परिवार को मोटी रकम देकर, सजा से राहत पाने की कोशिश। ऑफर किया गया mdash; 1 मिलियन डॉलर।

कहानी की परतेंhellip; और भी गहरी हैं
निमिषा यमन में क्लीनिक चला रही थी। मजबूरी में वहां के एक नागरिक के साथ साझेदारी करनी पड़ी। लेकिन पार्टनर नेhellip;फर्जी डॉक्यूमेंट्स से शादी का दावा, पासपोर्ट छीन लिया, मारपीट, शोषणhellip; और फिर ये खौफनाक मोड़।

2017 में हत्याhellip;
2020 में फांसी की सजाhellip;
2023 में यमन की सुप्रीम कोर्ट से भी कोई राहत नहीं।
अब भारत की सुप्रीम कोर्ट में आखिरी उम्मीद की तलाश।

केस 2 – शहजादी खानhellip; अब सिर्फ एक कहानी
यूएई में 15 फरवरी को फांसी दी जा चुकी।
परिवार अब भी सदमे मेंhellip;कानून के फैसले के आगे कोई आवाज नहीं पहुंची।
सवाल वही mdash; क्या विदेश में जाकर ऐसी गलतियां मजबूरी में होती हैं या लालच में?

क्या निमिषा के परिवार की ये जद्दोजहद रंग लाएगी?
क्या ब्लड मनी से उसकी जान बच पाएगी?
या फिर 16 जुलाईhellip; तारीख बन जाएगी एक और महिला की आखिरी सांस का दिन?

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Author: Deepak Mittal

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