भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सेक्टर में खलबली मचाने वाला कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने डिविडेंड से जुड़े नियमों का नया ड्राफ्ट जारी कर साफ कर दिया है कि अब बैंक अपनी मर्जी से मुनाफा नहीं बांट पाएंगे।
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, RBI का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बैंक सिर्फ शेयरधारकों को खुश करने के चक्कर में अपनी पूंजी और स्थिरता को खतरे में न डालें।
क्या है RBI का नया प्रस्ताव
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, अब कोई भी बैंक अपने शुद्ध मुनाफे का अधिकतम 75 फीसदी ही डिविडेंड के रूप में बांट सकेगा। यानी पूरा मुनाफा शेयरधारकों में बांटना अब संभव नहीं होगा। इससे बैंकों पर अपनी पूंजी मजबूत बनाए रखने का दबाव बढ़ेगा।
मुनाफा होना पहली और जरूरी शर्त
RBI ने साफ किया है कि डिविडेंड तभी दिया जा सकेगा जब संबंधित वित्तीय वर्ष में बैंक मुनाफे में हो। अगर बैंक घाटे में है या उसकी बैलेंस शीट कमजोर है, तो डिविडेंड देने की इजाजत नहीं मिलेगी।
केंद्रीय बैंक का मानना है कि नुकसान झेल रहे बैंक का मुनाफा बांटना जोखिम भरा फैसला हो सकता है।
बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स पर बढ़ी जिम्मेदारी
नए नियमों में बैंकों के बोर्ड की भूमिका बेहद अहम कर दी गई है। डिविडेंड घोषित करने से पहले बोर्ड को बैंक की
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भविष्य की योजनाएं
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पूंजी की जरूरत
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संभावित जोखिम
पर गंभीरता से विचार करना होगा। मतलब, अब जल्दबाजी में फैसला लेना आसान नहीं होगा।
बड़े बैंकों के लिए ज्यादा सख्ती
देश के बड़े और सिस्टम के लिए अहम बैंकों पर RBI की नजर और कड़ी रहेगी। अगर ये बैंक ज्यादा डिविडेंड देना चाहते हैं, तो उन्हें उच्च पूंजी स्तर बनाए रखना अनिवार्य होगा। RBI चाहता है कि बड़े बैंक किसी भी आर्थिक संकट का सामना मजबूती से कर सकें।
RBI के हाथ में रहेगा अंतिम कंट्रोल
ड्राफ्ट में यह भी साफ है कि जरूरत पड़ने पर RBI के पास डिविडेंड पर सीधी रोक लगाने का अधिकार रहेगा। अगर किसी बैंक की हालत कमजोर पाई गई, तो केंद्रीय बैंक बिना देर किए हस्तक्षेप कर सकता है।
ग्रामीण और छोटे बैंकों को थोड़ी राहत
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और छोटे स्थानीय बैंकों के लिए नियमों में कुछ लचीलापन रखा गया है। ये बैंक अपने मुनाफे का अपेक्षाकृत बड़ा हिस्सा डिविडेंड में दे सकते हैं, बशर्ते उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो।
बैंकिंग सिस्टम को क्या होगा फायदा
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस फैसले से बैंकिंग सेक्टर ज्यादा सुरक्षित और स्थिर बनेगा। मजबूत पूंजी से बैंकों को कर्ज देने में सहूलियत होगी और संकट के समय झटके सहने की क्षमता बढ़ेगी।
सबसे अहम बात, इससे जमाकर्ताओं का भरोसा और मजबूत होगा।
Author: Deepak Mittal









