रायपुर। भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर के भूमि अर्जन में हुए मुआवजा घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ा खुलासा किया है। प्रकरण में गिरफ्तार तीन लोकसेवकों के विरुद्ध शुक्रवार को माननीय विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), रायपुर में प्रथम पूरक चालान पेश किया गया।
एसीबी द्वारा ब्यूरो में पंजीबद्ध अपराध क्रमांक 30/2025 के तहत आरोपियों के खिलाफ धारा 7(सी), 12 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) तथा धारा 409, 467, 471, 420 और 120-बी भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत प्रकरण दर्ज है।
जांच में सामने आया है कि आरोपियों के कृत्यों से शासन को कुल ₹39,65,89,257 (लगभग ₹40 करोड़) की आर्थिक क्षति हुई है। गिरफ्तार आरोपियों में दिनेश पटेल, लेखराम देवांगन और बसंती घृतलहरे शामिल हैं, जिन्हें 29 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था।
एसीबी के अनुसार, तीनों आरोपियों ने पटवारी पद पर रहते हुए भूमाफियाओं एवं निजी व्यक्तियों से मिलीभगत कर भूमि अभिलेखों में बैकडेट में बटवारा एवं नामांतरण कर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए। जांच में यह भी पाया गया कि अधिग्रहीत भूमि को कृत्रिम उपखंडों में विभाजित दर्शाकर वास्तविक देय राशि से अधिक मुआवजा भुगतान कराया गया।
विवेचना के अनुसार, दिनेश पटेल के कृत्यों से शासन को ₹30.82 करोड़, लेखराम देवांगन से ₹7.16 करोड़ तथा बसंती घृतलहरे से ₹1.67 करोड़ की आर्थिक क्षति हुई है।
Author: Deepak Mittal








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