Sonu Sood के बाद राजपाल यादव की मदद को आगे आए इंद्रजीत सिंह, 1.11 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता

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दिल्ली: अभिनेता राजपाल यादव के चेक बाउंस मामले में फिल्म इंडस्ट्री से लगातार मदद के हाथ आगे आ रहे हैं। अभिनेता सोनू सूद और राजनेता तेजप्रताप यादव के बाद अब म्यूजिक प्रोड्यूसर और जेम ट्यून्स म्यूजिक के मालिक राव इंद्रजीत सिंह यादव ने राजपाल यादव को 1 करोड़ 11 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की है।

राजपाल यादव ने भूल भुलैया, हंगामा सहित कई हिट फिल्मों में अपनी कॉमिक टाइमिंग और यादगार भूमिकाओं से दर्शकों को खूब हंसाया है, लेकिन निजी जीवन में वह इन दिनों गंभीर आर्थिक और कानूनी संकट से जूझ रहे हैं।

इंद्रजीत सिंह यादव ने इस मदद को लेकर कहा,
“राजपाल यादव ने अपने अभिनय से करोड़ों लोगों को खुशी दी है और वह भारतीय सिनेमा का अहम हिस्सा हैं। यह सहायता सिर्फ पैसों की नहीं, बल्कि जरूरत के समय एक इंसान के साथ खड़े होने की भावना है। हमारी इंडस्ट्री एक परिवार है और परिवार मुश्किल वक्त में साथ देता है।”

उन्होंने इंस्टाग्राम पर साझा किए पोस्ट में लिखा कि सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें राजपाल यादव की पीड़ा की जानकारी मिली, जिसे जानकर वे व्यथित हो गए।
“राजपाल यादव न केवल एक बेहतरीन कलाकार हैं, बल्कि एक अच्छे इंसान भी हैं। ऐसे कठिन समय में मानवता के नाते उनके और उनके परिवार के साथ खड़ा होना हम सभी का दायित्व है। जेम ट्यून्स फैमिली की ओर से मैं राजपाल भाई को 1.11 करोड़ रुपये की सहायता दे रहा हूं,” उन्होंने कहा।

इंद्रजीत सिंह यादव ने देशवासियों से भी अपील की कि वे इस संकट की घड़ी में आगे आकर राजपाल यादव और उनके परिवार का यथासंभव सहयोग करें।

गौरतलब है कि यह मामला साल 2010 का है, जब राजपाल यादव और उनकी पत्नी ने अपनी डायरेक्टोरियल फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए दिल्ली की एक कंपनी से करीब 5 करोड़ रुपये का लोन लिया था। फिल्म के फ्लॉप होने के बाद लोन चुकाने में परेशानी आई और कर्ज के बदले जारी किए गए कई चेक बाउंस हो गए। इसके चलते नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया।

समय के साथ ब्याज और पेनल्टी जुड़ने से बकाया राशि बढ़कर करीब 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। दिल्ली हाईकोर्ट ने कई बार भुगतान के लिए समय दिया, लेकिन रकम जमा नहीं हो सकी। हाल ही में कोर्ट ने और राहत देने से इनकार करते हुए राजपाल यादव को छह महीने की सजा काटने के लिए तिहाड़ जेल में सरेंडर करने का आदेश दिया था।

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Author: Deepak Mittal

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