सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग यानी NCSC की शक्तियों को लेकर अहम फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि आयोग की भूमिका मुख्य रूप से सलाह और सिफारिश देने तक सीमित है। आयोग के पास अदालत की तरह न्यायिक आदेश पारित करने का अधिकार नहीं है।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि NCSC अपने कामकाज के दौरान राज्य सरकार या केंद्र सरकार को अपनी सिफारिशें भेज सकता है। हालांकि, नौकरी से जुड़े मामलों में आयोग की ओर से जारी कोई भी आदेश संबंधित सरकार या विभाग के लिए बाध्यकारी नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के संबंधित प्रावधानों के तहत ऐसे आयोग सामाजिक कल्याण के उद्देश्य से बनाए गए संवैधानिक निकाय हैं। विधायिका ने इनकी भूमिका सलाह और सिफारिश देने वाली तय की है, न कि अदालत की तरह फैसला सुनाने वाली।
अदालत ने साफ किया कि NCSC को न्यायिक शक्तियों का इस्तेमाल करने या अदालत की भूमिका अपने हाथ में लेने के लिए नहीं बनाया गया है।
Author: Deepak Mittal










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