अमेरिका में वीज़ा धोखाधड़ी का बड़ा मामला, 11 भारतीय नागरिकों पर आरोप

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न्यूयॉर्क: United States में वीज़ा धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में 11 भारतीय नागरिकों पर आरोप लगाए गए हैं। अमेरिकी फेडरल वकीलों के अनुसार इन लोगों पर सुविधा दुकानों में नकली हथियारबंद डकैती की साजिश रचने का आरोप है, ताकि कर्मचारियों को अपराध का शिकार बताकर इमिग्रेशन आवेदन में झूठा दावा किया जा सके और इस आधार पर ग्रीन कार्ड हासिल किया जा सके।

आरोपितों में Jitendrakumar Patel (39), Maheshkumar Patel (36), Sanjaykumar Patel (45), Dipikaben Patel (40), Rameshbhai Patel (52), Amitaben Patel (43), Ronakkumar Patel (28), Sangeetaben Patel (36), Minkesh Patel (42), Sonal Patel (42) और Mitul Patel (40) शामिल हैं। ये सभी अमेरिका के विभिन्न राज्यों जैसे Massachusetts, Kentucky और Ohio में गैरकानूनी रूप से रह रहे थे।

अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार आरोपियों ने मैसाचुसेट्स और अन्य स्थानों पर कम से कम छह सुविधा दुकानों, शराब की दुकानों और फास्ट फूड रेस्टोरेंट में नकली हथियारबंद डकैती की साजिश रची और उसे अंजाम दिया। इस दौरान कथित “लुटेरा” कर्मचारियों या दुकान मालिकों को बंदूक जैसी दिखने वाली वस्तु से धमकाता था और कैश रजिस्टर से पैसे लेकर फरार हो जाता था। पूरी घटना दुकान के सीसीटीवी में रिकॉर्ड हो जाती थी।

इसके बाद कर्मचारी या दुकान मालिक कुछ मिनट इंतजार कर पुलिस को फोन करते थे और खुद को अपराध का पीड़ित बताते थे। इस आधार पर वे U nonimmigrant visa के लिए आवेदन करते थे। यह वीज़ा उन प्रवासियों को दिया जाता है, जो किसी गंभीर अपराध के शिकार हुए हों और जांच में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की मदद करते हों। इस वीज़ा के जरिए प्रवासी को अमेरिका में काम करने की अनुमति मिलती है और कुछ वर्षों बाद ग्रीन कार्ड पाने का रास्ता भी खुल जाता है।

अधिकारियों के मुताबिक इस साजिश में शामिल लोगों ने आयोजक को पैसे दिए थे, जबकि आयोजक ने दुकानों का इस्तेमाल नकली डकैती के लिए करने के बदले मालिकों को भुगतान किया था। मामले में पहले ही कथित “लुटेरे” और उससे जुड़े अन्य लोगों पर आरोप तय किए जा चुके हैं।

फेडरल अभियोजकों के अनुसार वीज़ा धोखाधड़ी की साजिश में दोषी पाए जाने पर आरोपियों को अधिकतम पांच साल तक की जेल, तीन साल तक निगरानी में रिहाई (सुपरवाइज्ड रिलीज) और 2.5 लाख डॉलर तक के जुर्माने की सजा हो सकती है।

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Author: Deepak Mittal

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