नई दिल्ली: दक्षिण एशियाई सीमा इलाकों से एक वायरल संदेश में दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नूर खान एयरबेस पर 2 मार्च 2026 को अफगान वायु सेना ने हवाई हमला किया, जिससे एयरबेस को गंभीर क्षति हुई। संदेश में यह भी कहा गया है कि पिछले साल मई 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारत ने इसी एयरबेस पर हमला किया था और अब तालिबान नेतृत्व वाली अफगान सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान पर बदले के तौर पर हमला किया है।
हालांकि, इस प्रकार के दावों के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है — न पाकिस्तान की सरकार/सेना ने सार्वजनिक तौर पर नुकसान का ब्यौरा दिया है, और न ही अफगान सरकार के रक्षा मंत्रालय की ओर से कोई स्वतंत्र प्रेस रिलीज जारी हुई है।
वायरल दावों में क्या कहा गया है?
संदेश में सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के हवाले से यह आरोप लगाया गया है कि:
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अफगानिस्तान की वायु सेना ने नूर खान एयरबेस पर “सटीक हवाई हमले” किए जिससे बेस की मरम्मत अधूरी रह गई।
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यह हमला पाकिस्तान के कथित हवाई हमलों के जवाब में किया गया।
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साथ ही बलूचिस्तान के क्वेटा में 12वीं डिवीजन मुख्यालय, खैबर पख्तूनख्वा के मोहम्मद एजेंसी के सैन्य ठिकानों तथा पास के कैंपों को भी निशाना बनाया गया।
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हमलों के बाद क्वेटा में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद होने की भी दावा की जा रहा है।
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पेशावर एयरबेस और अन्य स्थानों पर भी ड्रोन/हवाई हमला और गोलीबारी हुई।
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दोनों देशों की सेनाओं ने सीमाओं पर अलर्ट बढ़ा दिया है।
ये बयान सोशल मीडिया और वॉट्सऐप-स्टाइल पोस्ट में वायरल हैं, लेकिन किसी सरकारी प्रेस बयान, विश्वसनीय समाचार एजेंसी रिपोर्ट या आधिकारिक सैन्य बयान से पुष्ट नहीं हैं।
वास्तविकता और सीमित पुष्टीकरण
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ऐसी खबरों के फैलते समय यह महत्वपूर्ण है कि सरकारी स्रोत या प्रतिष्ठित समाचार चैनलों द्वारा पुष्टि न होने पर इन्हें सीधे सच्ची घटना के रूप में नहीं लिया जाए।
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पाकिस्तान वायु सेना और पाकिस्तान सरकार ने अभी तक किसी विदेशी हवाई हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
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अफगान तालिबान सरकार ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे हमलों के बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
राजनीति और सुरक्षा विश्लेषक अक्सर बताते हैं कि सीमा तनाव, पुरानी दुश्मनी और वायरल संदेशों को मिला कर गलत जानकारी तेजी से फैल सकती है। बिना पुष्ट स्रोतों वाली जानकारी को सही मान लेना स्थिति को और अधिक जटिल बना सकता है।
Author: Deepak Mittal










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