नई दिल्ली: Ministry of Finance की एक स्वतंत्र अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, Unified Payments Interface (UPI) देश में सबसे पसंदीदा भुगतान माध्यम बनकर उभरा है। भारत में कुल भुगतान लेन-देन में UPI की हिस्सेदारी 57 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो नकद लेन-देन के 38 प्रतिशत से अधिक है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस्तेमाल में आसानी और तुरंत फंड ट्रांसफर की सुविधा UPI की लोकप्रियता की प्रमुख वजह है। 65 प्रतिशत UPI उपयोगकर्ता रोजाना कई डिजिटल ट्रांजैक्शन करते हैं। खासतौर पर 18-25 वर्ष आयु वर्ग में UPI का इस्तेमाल 66 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो डिजिटल-फर्स्ट वित्तीय आदतों की ओर स्पष्ट बदलाव दर्शाता है।
डिजिटल पेमेंट में बढ़ा भरोसा
अध्ययन में पाया गया कि 90 प्रतिशत उपयोगकर्ताओं ने UPI और RuPay कार्ड का उपयोग करने के बाद डिजिटल भुगतान में अधिक भरोसा जताया। इसके साथ ही नकदी के इस्तेमाल और एटीएम से निकासी में भी उल्लेखनीय कमी आई है।
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52% उपयोगकर्ताओं ने कैशबैक इंसेंटिव को अपनाने की मुख्य वजह बताया।
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74% ने भुगतान की तेज गति को सबसे बड़ा लाभ माना।
व्यापारियों में लगभग सार्वभौमिक स्वीकार्यता
छोटे व्यापारियों के बीच डिजिटल भुगतान की स्वीकार्यता लगभग सार्वभौमिक हो चुकी है। 94 प्रतिशत छोटे व्यापारियों ने UPI अपनाने की जानकारी दी, जबकि 72 प्रतिशत ने तेज लेन-देन, बेहतर रिकॉर्ड-कीपिंग और संचालन में सुविधा को लेकर संतुष्टि जताई। 57 प्रतिशत व्यापारियों ने डिजिटल भुगतान अपनाने के बाद बिक्री में वृद्धि की रिपोर्ट दी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इंसेंटिव स्कीम ने व्यापारियों और एक्वायरिंग बैंकों के लिए लागत संबंधी बाधाओं को कम करने और विभिन्न आय वर्गों व क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान के प्रति भरोसा बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और इकोसिस्टम का विस्तार
सरकार, National Payments Corporation of India (NPCI), बैंकों, फिनटेक कंपनियों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स के समन्वित प्रयासों से भारत का डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम मजबूत हुआ है।
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कुल डिजिटल ट्रांजैक्शन लगभग 11 गुना बढ़े।
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कुल डिजिटल ट्रांजैक्शन में UPI की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 80 प्रतिशत हो गई।
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UPI QR डिप्लॉयमेंट 9.3 करोड़ से बढ़कर 65.8 करोड़ हो गया।
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थर्ड-पार्टी ऐप प्रोवाइडर्स की संख्या 16 से बढ़कर 38 हो गई।
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UPI प्लेटफॉर्म पर ऑपरेशनल बैंकों की संख्या मार्च 2021 के 216 से बढ़कर मार्च 2025 तक 661 हो गई।
इस दौरान कम मूल्य के करेंसी नोटों के उपयोग और एटीएम से नकदी निकासी में कमी दर्ज की गई, जो छोटे डिजिटल ट्रांजैक्शन पर बढ़ती निर्भरता को दर्शाती है।
8,276 करोड़ रुपये का बजट समर्थन
सरकार ने इस योजना के लिए कुल 8,276 करोड़ रुपये का बजट समर्थन प्रदान किया।
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FY 2021–22: 1,389 करोड़ रुपये
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FY 2022–23: 2,210 करोड़ रुपये
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FY 2023–24: 3,631 करोड़ रुपये
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FY 2024–25: 1,046 करोड़ रुपये
“RuPay डेबिट कार्ड और कम वैल्यू वाले BHIM-UPI (P2M) ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए इंसेंटिव स्कीम का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव विश्लेषण” शीर्षक से जारी इस रिपोर्ट में डिजिटल भुगतान, भुगतान अवसंरचना सुदृढ़ीकरण और वित्तीय समावेशन पर सरकार की इंसेंटिव नीति के प्रभाव का आकलन किया गया है।
रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि भारत तेज़ी से कम-नकदी और डिजिटल रूप से सशक्त अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है।
Author: Deepak Mittal










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