रायपुर: राजधानी के पहलाजानी हॉस्पिटल और माता लक्ष्मी नर्सिंग होम प्रबंधन के खिलाफ बच्चा बदलने के गंभीर आरोपों के मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर की गई है। मामला वर्ष 2023 का है, जब अस्पताल के डॉक्टरों पर नवजात बच्चों की अदला-बदली का आरोप लगा था।
दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिले के बचेली निवासी अशोक कुमार सिंह और उनकी पत्नी उषा सिंह संतान प्राप्ति के लिए वर्ष 2022 में रायपुर के अनुपम नगर स्थित माता लक्ष्मी नर्सिंग होम पहुंचे थे। यहां संचालित पहलाजानी टेस्ट ट्यूब बेबी एंड सरोगेसी सेंटर में डॉक्टरों द्वारा आईवीएफ प्रक्रिया के जरिए संतान होने का आश्वासन दिया गया। अक्टूबर 2022 में पहली बार आईवीएफ प्रक्रिया कराई गई, जिसमें उषा सिंह गर्भवती हुईं, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से दिसंबर 2022 में गर्भपात कराना पड़ा।
इसके बाद अप्रैल 2023 में दोबारा आईवीएफ प्रक्रिया कराई गई, जिसमें जांच के दौरान गर्भ में जुड़वा बच्चों की पुष्टि हुई। आरोप है कि 25 दिसंबर 2023 को बिना परिजनों की पूर्व जानकारी के उषा सिंह को ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया। डिलीवरी के बाद उषा सिंह ने परिजनों को बताया कि उन्होंने एक लड़का और एक लड़की को जन्म दिया है, लेकिन कुछ समय बाद जो नवजात उन्हें सौंपे गए, वे अलग प्रतीत हुए।
परिजनों ने बच्चों की अदला-बदली का आरोप लगाया, जबकि अस्पताल प्रबंधन और इलाज कर रहे डॉक्टर नीरज पहलाजनी व डॉक्टर समीर पहलाजनी ने इसे गलतफहमी बताया। संदेह गहराने पर अशोक कुमार सिंह ने निजी एजेंसी से डीएनए जांच कराई और मामला न्यायालय तक पहुंचाया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने रायपुर एसपी को निर्देश दिया कि शिकायत को एफआईआर के रूप में दर्ज कर माता लक्ष्मी नर्सिंग होम, पहलाजानी टेस्ट ट्यूब बेबी एंड सरोगेसी सेंटर, उसके संचालकों, संबंधित डॉक्टरों और पैथोलॉजी लैब मेट्रोपोलिस की भूमिका की जांच की जाए। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
Author: Deepak Mittal










Total Users : 8181543
Total views : 8213427